मुरादाबाद। सपा सांसद डा. एसटी हसन ने कहा कि पति एवं पत्नी के बीच मतभेद और एक साथ रहने जैसे हालात न हों तो पत्नी को जलाने और गोली मारने से तलाक देना बेहतर है। उन्होंने कहा कि किसी को जलाना और हत्या करना संगीन अपराध है। लेकिन, तीन तलाक के बाद भी समझौते की गुंजाइश होती है।
लोकसभा में गुरुवार को बहुमत से तीन तलाक बिल पास हो गया। सांसद डा. एसटी हसन से इस बाबत बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि तीन तलाक मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। तीन तलाक कानून में पति को तीन साल की सजा का प्रावधान है। उसकी जमानत भी नहीं है। जबकि अन्य धर्मों में तलाक पर एक साल की सजा का कानून है। डा. हसन ने कहा कि तीन तलाक लड़की और उसके परिवारवालों पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अन्य धर्मों में पति एवं पत्नी के बीच मतभेद होने पर पत्नी को जलाकर या फिर गोली मारकर हत्या कर देते हैं। पत्नी को मारने से अच्छा तलाक देना है।
लोकसभा में रामपुर के सांसद आजम खां के विवादित बयान पर डा. हसन ने कहा कि गलतफहमी के चलते सदन में हंगामा हुआ। आजम खा ने बतौर भाई डिप्टी स्पीकर रमा देवी के सामने अपनी बात रखी। इसमें कोई गलत बात नहीं थी, लेकिन सदस्यों ने इसे गलत तरीके से पेश करते हुए हंगामा खड़ा किया।
- कांग्रेस मुसलिम महिला विरोधी नहीं है, लेकिन तीन तलाक कानून का समर्थन नहीं करती है। तीन तलाक कानून से मुश्किलें और अधिक बढ़ेंगी। दोनों पक्षों को सुनकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए। कानून में पति के जेल जाने के बाद समझौते की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी। पत्नी एवं बच्चों की परवरिश - डा. एपी सिंह, निवर्तमान जिलाध्यक्ष कांग्रेस
- तीन तलाक कानून शरीयत और महिलाओं के खिलाफ है। शरीयत कानून में दखल नहीं देना चाहिए। सरकार विशेष समुदाय के पीछे पड़ी है। लोगों के विरोध के बाद भी अगर तीन तलाक पर कानून बनाया जा रहा है तो मॉब लिचिंग रोकने के लिए कानून क्यों पास नहीं हो रहा है। - हाजी मन्नू कुरैशी, महानगर अध्यक्ष सपा