स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने के मामले में मुरादाबाद डी श्रेणी में पहुंच गया है। जिले का लीड बैंक केनरा बैंक ही समूहों को ऋण देने के मामले में काफी पीछे चल रहा है। जिले में सबसे अधिक शाखा वाला प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक भी लोन देने के मामले में काफी पीछे है।
जिले में 12 हजार स्वयं सहायता समूह हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत शासन की ओर से 2543 समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने के लिए वार्षिक लक्ष्य दिया गया है। वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2024 तक 636 समूहों को ऋण दिया जाना था, लेकिन सिर्फ 390 समूहों को ही ऋण दिया जा सका। यह लक्ष्य का करीब 61 फीसदी है। इसके चलते अपना जिला ऋण उपलब्ध कराने में डी श्रेणी में पहुंच गया है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक की 121 शाखाएं हैं, लेकिन इनके द्वारा कुल 263 समूहों को ही ऋण दिया गया। केनरा बैंक यहां का लीड बैंक हैं और जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 11 शाखाएं हैं, लेकिन इसके द्वारा भी सिर्फ 19 समूहों को ही ऋण दिया गया। सबसे बेहतर प्रदर्शन एसबीआई का है। जिले में इसकी कुल 15 शाखाएं हैं, लेकिन एसबीआई द्वारा 93 स्वयं सहायता समूहों को ऋण वितरित किया जा चुका है। इसी तरह बैंक ऑफ इंडिया की दो शाखाओं ने पांच, पीएनबी ने सात समूहों को ऋण वितरित किया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अक्सर ऋण देने के मामले में बैंकों पर टालमटोल करने का आरोप लगाती रहती हैं।
जिले में तिमाही लक्ष्य के सापेक्ष करीब 61 फीसदी स्वयं सहायता समूहों को बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध कराया गया है। सबसे खराब स्थिति प्रथमा और केनरा बैंक की है। समूहों की महिलाएं बैंक अधिकारियों द्वारा ऋण देने के मामले में परेशान करने की शिकायतें भी करती हैं। बैंकों की स्थिति से जल्द ही शासन को अवगत कराया जाएगा। - राजनाथ भगत, उपायुक्त, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन।