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डीएम को तलब होने का आदेश मिलने पर तालाब की सफाई के लिए जागे, अब फिर भूले

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गांव सोनकपुर देहात के तालाब की अब है यह स्थिति।अमर उजाला - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। शहर से सटी ग्राम पंचायत सोनकपुर देहात में 1050 वर्ग मीटर का तालाब इन दिनों अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। एक साल पहले एक जनहित याचिका पर इसकी सफाई न होने को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने डीएम को व्यक्तिगत रूप से तलब करने का आदेश दिया था। जिसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन इस तालाब की सफाई कराई थी, लेकिन इसके बाद फिर अधिकारी इसकी सुध लेना भूल गए। नतीजतन यह तालाब फिर गंदगी से पट गया है। खुदाई व सफाई न होने से उसमें घास उग आई है। खास बात यह है कि जल संरक्षण को लेकर तमाम स्थानों पर तालाबों की खुदाई मनरेगा आदि के माध्यम से हुई है, लेकिन इसके बाद भी इस तालाब की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
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भूगर्भ में गिरते जल स्तर को ध्यान में रखते हुए सरकार जल संरक्षण को लेकर लगातार विभिन्न योजनाएं चला रही है। लेकिन शहर से सटी ग्राम पंचायत सोनकपुर देहात उर्फ भोला सिंह की मिलक में स्थित तालाब का पुरसा हाल नहीं है। देख-रेख व संरक्षण के अभाव के चलते लोग वहां कूड़ा करकट भी डालने लगे हैं। जिसके चलते तालाब का किनारा डलावघर लगने लगा है। प्रशासन द्वारा इसकी अनदेखी किये जाने पर गांव के एक अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें हाईकोर्ट ने 15 मई 2018 को तालाब को साफ करने का आदेश पारित किया था। तालाब की 200 मीटर भूमि जिस पर सरकार द्वारा सड़क के रूप में अतिक्रमण किया गया है, उसके स्थान पर और किस स्थान पर तालाब खोदा जा सकता है इसका भी सुझाव डीएम से मांगा था, लेकिन 23 जनवरी 2020 तक भी तालाब साफ नहीं होने पर सरकार को तीन सप्ताह का अवसर देते हुए हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2020 को या उससे पहले तालाब साफ ना होने की स्थिति में डीएम मुरादाबाद को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश भी दिया था।
इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने आनन-फानन जेसीबी, दर्जनों मजदूर लगाकर कई दिन तक तालाब की खुदाई व सफाई कराई। इसके बाद से तालाब अपने अस्तित्व में भी आ गया था, लेकिन इसके बाद जिम्मेदारों ने फिर इधर से नजर फेर ली है। इसके चलते यह तालाब एक साल के भीतर ही अब दोबारा गंदगी से पट चुका है। तालाब के किनारे कूड़ा घर में तब्दील हो गए हैं वहीं पानी न होने के कारण तालाब में घास उग आई है। गंदगी से भरे इस तालाब से निकलने वाली बदबू के चलते जहां लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं इससे संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा भी पैदा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि इस तालाब की यह स्थिति तब है जब हाईकोर्ट एक साल पहले ही इसकी स्थिति पर चिंता जता चुका है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि वर्षा ऋतु में इस तालाब को जल संरक्षण के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।
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तालाब की सफाई न होने की जानकारी अब मिली है। जल्द ही अधिकारियों को मौके पर भेज कर उसकी स्थिति को दिखवाएंगे। तालाब को उसके स्वरूप में लाने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उसे सुंदर बनाने का भी कार्य किया जाएगा। जिसका लाभ गांव के साथ-साथ शहर के आसपास के रहने वाले लोगों को मिलता रहे।
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- शैलेंद्र सिंह, जिलाधिकारी
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