तिगरी के रहने वाले पंडित गंगा शरण शर्मा के मुताबिक, पितरों के तर्पण के लिए पितृ अमावस्या पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन वह सब लोग अनिवार्य रूप से पतित पावनी में डुबकी लगाते हैं, जिनके माता-पिता या इनमें एक दुनिया में नहीं है। गंगा में स्नान कर कुशा को जल अर्पित करने और धार्मिक अनुष्ठान करने से पितृ प्रसन्न और तृप्त होते हैं।
पितृ अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने पितरों के तर्पण को पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाई। इसके बाद गंगा किनारे धार्मिक अनुष्ठान कराए। आधी रात से ही श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की वजह से गजरौला-तिगरी मार्ग पर जाम लगा रहा। श्रद्धालुओं के वाहन जाम में फंसे रहे।
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तिगरी के रहने वाले पंडित गंगा शरण शर्मा के मुताबिक, पितरों के तर्पण के लिए पितृ अमावस्या पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन वह सब लोग अनिवार्य रूप से पतित पावनी में डुबकी लगाते हैं, जिनके माता-पिता या इनमें एक दुनिया में नहीं है। गंगा में स्नान कर कुशा को जल अर्पित करने और धार्मिक अनुष्ठान करने से पितृ प्रसन्न और तृप्त होते हैं।
रविवार को पितृ विसर्जनी अमावस्या होने के कारण आस पास ही नहीं बल्कि दूर दराज के श्रद्धालु तिगरी और ब्रजघाट में डुबकी लगाने पहुंचे। हालांकि इस अमावस्या पर तिगरी में श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा रहती है। पितरों के तर्पण के लिए आधी रात के बाद से ही श्रद्धालुओं का गंगा में डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो गया।
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हर-हर गंगे उदघोष संग पतित पावनी में डुबकी लगाई। इसके बाद पितरों के तर्पण के लिए गंगा किनारे धार्मिक अनुष्ठान कराए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनके वाहनों के कारण तिगरी-गजरौला मार्ग पर जाम लगा रहा। फाजलपुर रेलवे फाटक से लेकर कुमराला तक वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। वहीं ब्रजघाट गंगा में भी स्नान के कारण हाईवे पर जाम के हालात बने रहे। जिसके कारण वाहन रेंग रेंगकर गुजरे।