शासन द्वारा विकास कार्यों के लिए जारी किया गया बजट अभी तक यूं ही पड़ा है। बजट के इस्तेमाल को कोई प्लानिंग अभी तक नहीं हो पाई है। कुछ योजनाओं में तो फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है। बजट समय से रिलीज हो इसके लिए अफसरों के द्वारा भी कोई पैरवी नहीं की गई। जबकि वित्तीय वर्ष खत्म होने में केवल 44 दिन का ही समय बचा है।
स्वास्थ्य विभाग को शासन स्तर से 36 करोड़ 47 लाख का बजट जारी किया गया था। जिसमें से अभी तक 19 करोड़ 65 लाख ही खर्च हो पाया है। सोलह करोड़ 78 लाख रुपया अभी तक शेष है। नगर निगम को तेरहवें और चौदहवें वित्त में 21 करोड़ रुपया मिला था। अभी तक 10 करोड़ रुपया भी खर्च नहीं हो पाया है।
इनके अलावा सिंचाई विभाग, गन्ना विभाग, लोकनिर्माण विभाग, वन विभाग, विकास विभाग, नहर विभाग, समाज कल्याण विभाग और उद्यान विभाग समेत कई महकमे मिले बजट को खर्च नहीं कर पाए हैं। न ही शासन स्तर पर फंसे बजट को रिलीज कराने के लिए कोई सिफारिश अभी तक की गई है।
241 करोड़ की जिला योजना में मिला केवल 10 करोड़
जनपद के विकास के लिए 241 करोड़ की जिला योजना मंजूर की गई थी। पूरा वित्तीय वर्ष समाप्त होने जा रहा है मगर अभी तक केवल दस करोड़ रुपया ही मिल सका है। बीस से ज्यादा विभाग तो ऐसे हैं जिन्हें अभी तक एक धेला अनुमोदित बजट में से नहीं मिला है। जिन स्कीमों के संचालन को मशीनरी बड़े बड़े दावे कर रही थी उनमें तो कोई पैसा अभी तक आया ही नहीं है। आएगा भी या नहीं इसकी जानकारी भी किसी को नहीं है।