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जीएम के पकड़े जाने की विभागीय जांच शुरू

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मुरादाबाद। प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय में रविवार को सीबीआई द्वारा रंगे हाथ पकड़े गए महाप्रबंधक मामले में पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य कार्यालय ने जांच शुरू कर दी है। प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक के चेयरमैन का कहना है कि इसके पीएनबी मुख्य कार्यालय को पत्र लिखा गया है। चूंकि जीएम रविकांत वहीं से स्थानांतरित होकर प्रति नियुक्ति पर आए थे तो ऐसे में उन पर कार्रवाई का मूल अधिकार पीएनबी के ही पास है। उधर बैंक प्रबंधन ने इस बाबत संबंधित दस्तावेज जुटाए हैं।
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सीबीआई की इस छापेमारी के मामले में सोमवार को चेयरमैन राकेश कुमार अरोड़ा ने बात की। उन्होंने कहा कि जो जांच सीबीआई ने की है उसी के आधार पर कार्रवाई के लिए मुख्य कार्यालय को लिखा गया है। भविष्य में किसी अन्य अधिकारी द्वारा ऐसा न हो, इसके लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। रविवार को सीबीआई की टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए महाप्रबंधक रविकांत को 50 हजार रुपए और एलईडी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था। यह कार्रवाई रिकवरी एजेंसी की शिकायत पर हुई थी। सीबीआई टीम ने 60 से 70 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा होने की आशंका व्यक्त की है।
बैंक और सीबीआई द्वारा शिकायत एजेंसी के दावे में अंतर
रविवार को सीबीआई टीम मामले की शिकायत सनराइज रिकवरी एजेंसी द्वारा करने की शिकायत का दावा किया था, जबकि सोमवार को चेयरमैन राकेश कुमार अरोड़ा का कहना है कि यह शिकायत उपाध्याय रिकवरी एजेंसी द्वारा की गई है। यह एजेंसी वर्ष 2012 से बैंक के साथ जुड़कर रिकवरी का कार्य कर रही है। इसी कंपनी के व्यक्ति ने रविवार को रविकांत को 50 हजार रुपए और एलईडी दिए थे। इसके अलावा सीबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड और शाखा प्रबंधकों के ट्रांसफर और नियुक्ति मामले से भी जोड़कर देखने की बात कही थी। टीम के अधिकारियों के अनुसार इसी वजह से रविकांत के फोन और लैपटॉप को भी कब्जे में लिया गया था, लेकिन बैंक अधिकारी मामले को सिर्फ रिश्वत तक ही जोड़कर देख रहे हैं।
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पांच प्रतिशत कमीशन का है खेल
रिकवरी एजेंसी नियुक्त करने की जिम्मेदारी शाखा प्रबंधक की है। बैंक अधिकारियों के अनुसार एनपीए ऋण की रिकवरी के लिए एजेंसी नियुक्त करने की जिम्मेदारी शाखा प्रबंधक तथा क्षेत्रीय प्रबंधक की है। रिकवरी करने वाली एजेंसी को रिकवरी करने पर पांच प्रतिशत मिलता है। महाप्रबंधक को एजेंसी नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। फिर भी इस मामले में महाप्रबंधक रविकांत संलिप्त हो रहे थे। यही कारण रहा कि सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण में जाल बिछा दिया।
कहां गए रिकवरी के पांच लाख
रविवार को जब टीम ने रविकांत को पकड़ा था तो 50 हजार रुपए की रिश्वत के अलावा पांच लाख रुपए रिकवरी के मिलने की बात स्वीकारी थी, लेकिन सोमवार को बैंक अधिकारियों ने पांच लाख रुपए सीबीआई को मिलने से स्पष्ट इन्कार कर दिया। कहा कि जो रिपोर्ट सीबीआई ने उन्हें भेजी है उसमें पांच लाख रुपये का कोई जिक्र नहीं है।
अधिकारियों की भूमिका से किया इंकार
सीबीआई की टीम ने रविवार को मामले में दो महाप्रबंधक और तीन-चार चीफ मैनेजर की भूमिका संदिग्ध होने की आशंका व्यक्त की थी, लेकिन सोमवार को बैंक अधिकारियों ने किसी भी जीएम या चीफ मैनेजर की भूमिका संदिग्ध होने से स्पष्ट इंकार कर दिया। इतना ही नहीं क्रेडिट कार्डों पर भी बैंक अधिकारी काम शुरू नहीं कर सके। रविकांत ने एक जुलाई को प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक में ज्वाइन किया था। इस डेढ़ महीने में बैंक की ओर से कितने किसान क्रेडिट कार्ड जारी हुए और कितने ट्रांसफर हुए हैं, इसका डाटा बैंक अधिकारी सोमवार देर शाम तक नहीं जुटा पाए जबकि इस मामले को क्रेडिट कार्डों के फर्जीवाड़े से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
वर्जन...
रविकांत द्वारा रिश्वत लेने का मामला चौंकाने वाला है। इसकी शिकायत हमने पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य कार्यालय में की है। इसके अलावा एचआर विभाग और बैंक की विजिलेंस टीम को भी दी है। वहां से जो आदेश आएगा, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी- राकेश कुमार अरोड़ा, चेयरमैन, प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक।
इस प्रकरण में पीएनबी बैंक प्रबंधन ने आंतरिक विभागीय जांच शुरू कर दी है। कुछ दस्तावेज मांगे गए हैं। अहम सवाल यह है कि जो एजेंसी दो साल से काम कर रही हैै उससे रिश्वत क्यों मांगी गई है - अशोक कुमार आरएम प्रथमा बैंक
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