इसके कारण विभाग संक्रमित मरीजों को फोन कर उनकी स्थिति भी नहीं पूछ रहा। गांवों में बुखार से जान गवांने वाले लोगों के यहां डेथ ऑडिट भी बंद हो गया है। इस व्यवस्था से परेशान लोग छोलाझाप डॉक्टरों के यहां भटकने को मजबूर हैं। जहां उन्हें इलाज के नाम पर न सिर्फ ग्लूकोस चढ़ाया जा रहा है, बल्कि मोटा पैसा वसूला जा रहा है। ताजपुर के गांव सिरसवां गौड़, कुंदरकी के खजरा, बघी गोवर्धनपुर में तमाम लोग बुखार से पीड़ित हैं। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाने बंद कर दिए हैं। सिर्फ रविवार को आयुष्मान मेलों के नाम पर कुछ लोगों का परीक्षण कर लिया जाता है। सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह का कहना है कि मरीजों की स्थिति पर टीम से लगातार चर्चा की जा रही है, यदि किसी क्षेत्र में छिड़काव रह गया है तो वहां स्टाफ को भेजा जाएगा।
- मैं गोविंदनगर में रहता हूं। यहां तीन दो लोग डेंगू पॉजिटिव मिले थे। अब तक न एंटी लार्वा छिड़काव हुआ है न फॉगिंग। दोनों मरीज अब लगभग स्वस्थ हो चुके हैं।
- अरुण प्रजापति
- मैं डेंगू के कारण 15 दिन निजी अस्पताल में भर्ती रहा। मेरे पास न तो स्वास्थ्य विभाग से कोई फोन आया, न ही मेरे घर एंटी लार्वा छिड़काव किया गया है।
- प्रमोद कुमार, एकता कॉलोनी