पीतलनगरी के मदरसों से निकले हाफिज इस बार देशभर की तमाम मस्जिदों में नमाज-ए-तरावीह में कुरान सुनाएंगे। ज्यादातर हाफिजों की बुकिंग पहले ही हो चुकी है। जो बचे हैं, वे गैर प्रांतों में मौजूद मस्जिदों के मुतवल्ली के संपर्क में हैं। वे तीन-चार जून के बाद विभिन्न प्रदेशों के लिए रवाना हो जाएंगे। मुरादाबाद के हाफिजों की डिमांड की वजह यह है कि यहां के कई पुराने मदरसों में हाई क्वालिटी की इस्लामी शिक्षा और हाफिजों की दिल को छू लेने वाली किरत है।
माह-ए-रमजान पर नमाज-ए-तरावीह के लिए मुरादाबाद के हाफिजों की काफी डिमांड है। हर साल मदरसों से निकले वाली हाफिज की नई पौध देश के तमाम राज्यों की मस्जिदों में कुरान सुनाने को तैयार रहती है। महानगर के मदरसा जामिया नईमिया के टीचर मुफ्ती मोहम्मद बाकर अली राजस्थानी बताते हैं यूपी-बिहार के मदरसों से सबसे ज्यादा हाफिज निकलते हैं। अकेले मुरादाबाद से तकरीबन डेढ़ हजार हाफिज में दूसरे राज्यों में नमाज-ए-तरावीह पढ़ाने जाते हैं। इसके लिए गैर राज्यों के मुतवल्ली शहर के मदरसाें के प्रिंसिपल से कांटेक्ट करते हैं। शहर तय होने के बाद हाफिज को वहां भेज दिया जाता है। जहां पांच दिन से 28 दिन में नमाज-ए-तरावीह में कुरान मुकम्मल करते हैं।
इन राज्यों में मुरादाबाद के हाफिजों की डिमांड
मुरादाबाद। वैसे तो करीब-करीब हर राज्यों से मुरादाबाद के हाफिज के लिए बुलावा आता है। लेकिन यहां के अधिकांश हाफिज यूपी के शहरों के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र, कश्मीर, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर की मस्जिदों में कुरान सुनाने जाते हैं।
तय नहीं होती है नजराने की रकम
मुरादाबाद। नमाज-ए-तरावीह में कुरान सुनाने पर हाफिज को नजराने के तौर पर रकम मिलती है। ये रकम तय नहीं होती है। जैसा शहर होता है वैसा ही नजराना मिलता है। हाफिज को दस हजार से पचास हजार रुपये तक का नजराना मिल जाता है।
एक रात में भी मुकम्मल करेेंगे कुरान
मुरादाबाद। रमजान पर कई शहरों में एक रात में भी कुरान मुकम्मल होते हैं। ये सबीना कहते हैं। पांच से छह हाफिज मिलकर आपस में हिस्सेदारी कर एक ही रात में कुरान मुकम्मल कर लेते हैं।