मासिक पास की कीमत भी बढ़ी
भारी वाहनों से पहले 385 रुपये और अब 395 रुपये लिया जाएगा। ओवर साइज वाहनों से पहले 470 रुपये लिया जाता था। इसे बढ़ाकर 480 रुपये कर दिया गया है। मासिक पास की कीमत भी 2475 रुपये का हो गया है।
जोया टोल प्लाजा से प्रतिदिन औसतन 20 हजार छोटे वाहन गुजरते हैं। हालांकि टोल बढ़ने के बावजूद हाईवे पर यात्रियों के लिए सुविधाएं अभी भी न्यूनतम हैं। यात्रियों का कहना है कि न तो शौचालय की उचित व्यवस्था है और न ही पर्याप्त रोशनी व अन्य सुविधाएं।
हाईवे पर बने हैं जगह-जगह कट
अधिवक्ता इफ्तेखार सैफी ने कहा कि टोल बढ़ाने से पहले यात्रियों और वाहन मालिकों के लिए आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। हाईवे पर जगह-जगह कट बने हैं और कई स्थानों पर सड़क खस्ताहाल है। टोल प्लाजा पर लाइन लगने की समस्या भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है।
कठिनाई और महंगाई बढ़ाने जैसा
हाईवे पर कट और अव्यवस्थाओं के बीच टोल बढ़ाना वाहन चालकों के लिए कठिनाई और महंगाई बढ़ाने जैसा है। इससे साफ है कि एनएच पर एक अप्रैल से टोल वृद्धि से वाहन चालकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
लोगों की मांग है कि टोल बढ़ाने से पहले हाईवे की मूलभूत समस्याओं को दूर किया जाना चाहिए। टोल इंचार्ज संतू ने बताया यह टोल टैक्स 31 मार्च की आधी रात से लागू होगा।
हाईवे पर कई जगह नहीं लाइटें
हाईवे चौड़ीकरण के बाद जिम्मेदारों की ओर से लाइट नहीं लग पाई गई है। जगह-जगह लाइटें नहीं होने की वजह से हाईवे पर अंधेरा रहता है। जिस कारण हादसे होने का भी अंदेशा बना रहता है। हालांकि कुछ स्थानों पर लाइट जरूर लगाई गई हैं लेकिन बृजघाट से लेकर पाकबड़ा के बीच अधिकांश जगह लाइटों की दरकार है। लोगों का कहना है कि एनएचएआई साल दर साल टोल टैक्स बढ़ाती है। लेकिन उसके हिसाब से कोई सहूलियत नहीं दी जाती।
रात में गश्त नहीं करती एनएचएआई की टीम
भाकियू नेता चौधरी दिवाकर सिंह ने बताया कि हर जगह सरकार लोगों का शोषण कर रही है। स्थिति ये है कि टोल टैक्स बढ़ाने पर तो जोर दिया जा रहा है और सरकार ने बढ़ा भी दिया है लेकिन जोया के टोल प्लाजा पर लोगों के लिए कोई सहूलियत नहीं है।
जैसे टोल टैक्स बढ़ाया जा रहा है वैसे लोगों को सहूलियत भी मिलनी चाहिए। जोया टोल प्लाजा की स्थिति ये है कि रात में एनएचएआई की टीम अपने टोल टैक्स क्षेत्र में गश्त नहीं करती है। हाईवे होने पर क्रेन की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है।
अगर कोई हादसा हो जाए तो कई बार निजी क्रेन बुलाकर क्षतिग्रस्त वाहनों का हटाया जाता है। लेकिन, अगर टोल प्लाजा के जुड़े अधिकारियों से पूछने पर सभी सहूलियतों देने की बात कहते हैं।