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पहले पक्का मकान बनाऊंगा, तभी निकाह करूंगा अम्मी

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कांठ /मुरादाबाद (अभिषेक सिंह)। दिल्ली में हुए हादसे में समीर के साथ उसके सपने ने भी दम तोड़ दिया। सपना था कि वह पहले पन्नी से ढके छप्पर की जगह मां के लिए पक्का मकान बनवाएगा। इसके बाद निकाह करेगा। जिसमें वह, उसकी मां और पत्नी साथ साथ रहते लेकिन ये सपना सच न हो सका। उसने यह वायदा भी किया था।
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छजलैट के कुरी रवाना गांव में रहने वाले समीर के पिता मोहम्मद शमीम की चार साल पहले मौत हो गई थी। परिवार में उसकी मां खतीजा खातून तीन भाई और तीन बहनें हैं। सभी बहनों और भाईयों की शादी हो चुकी है। मां खदीना लगातार बीमार रहती हैं। उनके इलाज का पूरा खर्च भी समीर ही उठाता था। समीर अभी कुंवारा था। उसने अपनी कमाई की रकम से डेढ़ साल पहले बहन की शादी की। इसके बाद उसकी मां ने इच्छा जाहिर की थी कि समीर भी जल्द निकाह कर ले लेकिन समीर ने मां से वादा किया कि उसके हिस्से में आए पन्नी से बने छप्पर की जगह पहले वह मां के लिए पक्का मकान बनाएगा। इसके बाद वह निकाह करेगा। ये उसका सपनों का घर होता, जिसमें उसकी मां और पत्नी एक साथ रहते। इसके लिए वह दिल्ली जाकर कड़ी मेहनत करता था। ज्यादा काम करता था, जिससे की उसको ज्यादा पैसे मिले।कुछ दिन पहले ही फोन कर समीर ने अपनी मां से कहा था कि तीन- चार माह बाद वह दिल्ली से लौटेगा और मकान बनवाना शुरू कर देगा। लेकिन कुदरत को तो कुछ और ही मंजूर था। पति की मौत का गम झेल रही खतीजा खातनू की जिंदगी में एक बाद फिर से दुख ने दस्तक दी, दस्तक ऐसी कि जिसने उनके लाडले बेटे समीर को ही उनसे छीन लिया। दिल्ली की जिस फैक्टरी की कमाई से समीर को अपने सपनों का घर बनाना था, वहां लगी आग ने उसकी सांस छीन ली। फैक्टरी में हादसे की खबर मिलते ही रविवार को दिल्ली पहुंची खतीजा खातून को जब से बेटे की मौत की खबर मिली है। उनका रोकर बुरा हाल है। सोमवार को समीर के शव को परिवार के अन्य लोगों की मदद से वह दिल्ली से मुरादाबाद लेकर आईं तो उनके साथ परिवार और पूरा गांव रो पड़ा, सबकी आंखें नम हैं।
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