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Moradabad News: महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत, अस्पताल में हंगामा

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मंडी धनौरा। एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती की गई महिला और गर्भस्थ शिशु की भी मौत हो गई। मौत की जानकारी मिलने पर परिजनों ने जमकर हंगामा काटा और शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। परिजनों का आरोप था कि महिला को अधिक नशा दे दिया गया था। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देकर पुलिस ने करीब डेढ़ घंटे बाद जाम खुलवाया।
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थाना क्षेत्र के गांव दासपुर निवासी अतुल की 25 वर्षीय पत्नी पूजा नौ माह की गर्भवती थी। सोमवार की दोपहर करीब 12 बजे परिजनों ने उसे महादेव चुंगी पर स्थित एक नर्सिंग होम में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। शाम करीब चार बजे डिलीवरी से पहले ही अस्पताल संचालक ने पूजा की स्थित नाजुक बताते हुए बाहर ले जाने के लिए कह दिया। परिजन उसे दूसरे अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सक ने महिला को मृत घोषित कर दिया। वहीं, गर्भस्थ शिशु की भी मौत हो चुकी थी। गुस्साए परिजनों ने महिला के शव को एंबुलेंस में रखकर नर्सिंग होम के बाहर जाम लगा दिया। परिजन ने बताया कि दो दिन पहले नर्सिंग होम के संचालक ने डिलीवरी के लिए पूजा का आपरेशन किए जाने की बात कही थी। सोमवार को उसे आपरेशन के लिए भर्ती किया गया था।
परिजनों का आरोप था कि पूजा को अधिक नशा दे दिया गया था। जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। जाम लगाने की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने परिजनों से जाम खोलने के लिए कहा। प्रभारी निरीक्षक रविंद्र प्रताप का कहना था कि अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। करीब डेढ़ घंटे बाद भाकियू नेता दानवीर सिंह के आने के बाद जाम खोल दिया गया। पुलिस ने एक घंटे के भीतर अस्पताल संचालक को पकड़ने का आश्वासन दिया।
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नगर व ग्रामीण क्षेत्र में फर्जी अस्पतालों की है बाढ़
मंडी धनौरा। स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से नगर व ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में फर्जी नर्सिंग होम व अस्पताल संचालित हो रहे हैं। नगर की महादेव चुंगी, कंचन बाजार, शेरपुर चुंगी, अमरोहा रोड पर डाक्टरों के फर्जी बोर्ड लगाकर दर्जनों नर्सिंग होम व अस्पताल चल रहे हैं। ये अस्पताल सिर्फ डिलीवरी के लिए ही खोले गए हैं। पिछले दिनों प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे फर्जी तरीके से चल रहे अस्पताल व नर्सिंग होम की जांच कर लें। उन्होंने कहा था कि अस्पताल के बोर्ड पर दर्ज चिकित्सक का सत्यापन अवश्य किया जाए। लेकिन नोडल अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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