समाजशास्त्र विभाग हिंदू कॉलेज में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद भारत सरकार द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का शीर्षक साइबर सिक्योरिटी एंड इंडियन सोसाइटी : कॉन्सेप्ट फंक्शन और बेटरमेंट रहा।
मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज ऋषि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के पूर्व निदेशक प्रोफेसर बी एन सिंह ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल एक किसी इकाई की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के सभी क्षेत्रों से ठोस प्रयास की आवश्यकता है। साइबर अपराध के अंतर्गत सबसे तेजी से फैल रहे हनी ट्रैप के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस जाल में अधिकांश 60 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति शिकार हो रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि उपाधि महाविद्यालय पीलीभीत के प्राचार्य प्रो. दुष्यंत कुमार ने कहा कि भारत की साइबर सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने के लिए ठोस कार्यवाही की आवश्यकता है। इसमें प्रौद्योगिकी क्षमता निर्माण नियामक ढांचे और सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम शामिल है। उन्होंने शोधकर्ताओं से शोध पत्र एवं आलेख में अंतर स्पष्ट करने को कहा। हिंदू कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सत्यव्रत सिंह रावत ने बताया कि हमें अपने डिजिटल भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सहयोग, नवाचार और क्षमता निर्माण प्रयासों को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साइबर स्पेस भारतीय समाज के सभी वर्गों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए सुरक्षित समावेशी और अनुकूल बना रहे। डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बहुत सावधानी के साथ करने की आवश्यकता है।
अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर पूजन प्रसाद और शिक्षा संकाय की प्रभारी डॉक्टर रेनू यादव, अर्थशास्त्र विभाग की प्रो. प्रियंशा सिंह, अंग्रेजी विभाग के प्रो. आशुतोष सक्सेना ने विभिन्न सत्रों में प्राप्त हुए शोध पत्रों का विश्लेषण किया। विभिन्न शोधार्थियों से प्राप्त शोध पत्रों के आधार पर विशेषज्ञों ने यह माना कि इस सेमिनार से हमने साइबर सुरक्षा की उभरती अवधारणा का पता लगाया। इसे न केवल एक तकनीकी चुनौती के रूप में बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पहचाना है।
संयोजक डॉक्टर एसबी यादव ने कहा कि सेमिनार में 256 शोधार्थियों ने अपना पंजीकरण कराया। त्रिपुरा, मेघालय, मणिपुर, पंजाब, हरियाणा आदि के साथ साउथ अफ्रीका से भी शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। साउथ अफ्रीका से शोधार्थी बैनी ने बताया कि शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तो बढ़ रहा है, लेकिन हम अपनी नैतिक जिम्मेदारी भूलते जा रहे हैं। आज आवश्यकता है कि कैसे हम अपनी नैतिक जिम्मेदारी से शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करते हुए साहित्यिक चोरी को रोकें।
इस दौरान डॉ. जावेद अंसारी, डॉ. दिलीप कुमार, डॉ महेंद्र कुमार, डॉ. अरुण कुमार वर्मा, डॉ अमित वैश्य, डॉ विवेक कुमार, डॉ मनीष जोशी, डाॅ वीर बहादुर, डॉ. राजेश कुमार, डॉ बृजेश कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे।