फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Moradabad News: कपड़ा कारोबार पर संकट, एक साल में 70 फीसदी तक घटा व्यापार

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन, गली-मुहल्लों में खुलीं कपड़ों की दुकानों और बदलती खरीदारी की आदतों ने मुरादाबाद के कपड़ा कारोबार की रफ्तार रोक दी है। व्यापारियों का कहना है कि एक साल में कपड़ा कारोबार में करीब 70 प्रतिशत तक गिरावट आई है। उनका कहना है कि अब कई दुकानों पर पहले के मुकाबले महज 30 प्रतिशत तक कारोबार रह गया है। बिक्री घटने का असर रोजगार पर भी पड़ा है और कई दुकानदारों ने आधे से अधिक कर्मचारियों को हटा दिया है।
विज्ञापन

बुध बाजार, सिनेमा मार्केट, कोठीवाल नगर, गलशहीद और भट्ठी मोहल्ला समेत प्रमुख बाजारों में करीब 700 कपड़ा व्यापारी हैं। रेडीमेड और कपड़ा उत्पादन से जुड़ी करीब 100 इकाइयां भी हैं। कारोबार में आई गिरावट का असर इन इकाइयों पर भी पड़ रहा है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक पहले दुकान पर कपड़े पसंद करते हैं। उसकी गुणवत्ता और डिजाइन देखते हैं। इसके बाद मोबाइल पर उसी या मिलते-जुलते उत्पाद की कीमत खोजते हैं। ऑनलाइन कीमत कम मिलते ही कई ग्राहक खरीदारी रोक देते हैं। व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक साथ कई डिजाइन और ब्रांड मिल जाते हैं। डिस्काउंट और घर बैठे डिलीवरी की सुविधा होती है। ऐसे में स्थानीय दुकानदारों के लिए ग्राहक को रोकना मुश्किल हो रहा है।

00
350 करोड़ के कारोबार पर दबाव

-संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बताया कि मुरादाबाद का सालाना कपड़ा कारोबार करीब 350 करोड़ रुपये का है। इससे थोक और खुदरा कारोबार के साथ रेडीमेड कारोबारी भी जुड़े हैं। परिवहन और दूसरे छोटे कारोबार भी इससे प्रभावित होते हैं। कपड़े की मांग घटने से दुकानदार नया स्टॉक कम मंगा रहे हैं। इसका असर उत्पादन इकाइयों पर पड़ रहा है। कारखानों को पहले की तुलना में कम ऑर्डर मिल रहे हैं। उत्पादन घटने से रोजगार पर भी असर पड़ रहा है।
विज्ञापन


00

गली-मोहल्लों की दुकानें भी बनी चुनौती
-ऑनलाइन बाजार के साथ गली-मोहल्लों में खुली कपड़ों की दुकानें भी बड़े बाजारों के लिए चुनौती बन गई हैं। ग्राहकों को घर के पास ही रेडीमेड और अन्य कपड़े मिल जाते हैं। इससे मुख्य बाजारों में आने वाले ग्राहकों की संख्या घट रही है।
00
कपड़ा व्यापारी बोले...

-ग्राहक दुकान पर कपड़ा पसंद करते हैं। खरीदने से पहले मोबाइल पर कीमत देखते हैं। ऑनलाइन सस्ता मिलते ही खरीदारी रोक देते हैं। इससे काफी नुकसान होता है।-ऋषभ सिक्का, कपड़ा कारोबारी
-पहले बाजार में भीड़ बढ़ जाती थी। अब लोग जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। ऑनलाइन ऑफर से पारंपरिक बाजार प्रभावित है।-तस्वीर हुसैन, कपड़ा कारोबारी

-कारोबार घटने से दुकान का खर्च निकालना मुश्किल है। मजबूरी में कर्मचारियों की संख्या कम करनी पड़ी। स्टॉक भी पहले का आधा रह गया है।-दीपक कत्याल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश
-हर गली-मोहल्ले में कपड़ों की दुकान खुल गई है। ग्राहक को घर के पास ही सामान मिल जाता है। इससे मुख्य बाजारों में ग्राहक कम आ रहे हैं।-मनीष शर्मा, कपड़ा कारोबारी

-मांग कम होने से दुकानदार ऑर्डर घटा रहे हैं। इसका असर उत्पादन पर पड़ रहा है। पहले जितना माल तैयार होता था, अब उतना ऑर्डर नहीं मिलता।-अशोक सहगल, कपड़ा कारोबारी
-त्योहारों से कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन ऑनलाइन बाजार की चुनौती बनी हुई है। स्थानीय बाजार से खरीदारी बढ़े तो कारोबार और रोजगार को राहत मिलेगी।-यासर हुसैन, कपड़ा कारोबारी
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें