पुरानी घटनाओं से अफसरान चेते नहीं, नतीजतन रविवार को जिला अस्पताल के महिला वार्ड से एक और नवजात चोरी हो गया। चोरनी नर्स बनकर वार्ड में पहुंची और परिजनों को झांसा देकर घंटाभर पहले जन्मे नवजात को चुरा ले गई।
पांच बेटियों के बाद जन्मे इकलौते बेटे के चोरी होने से परिजनों में कोहराम मच गया। घटना से अस्पताल स्टाफ और पुलिस में भी हड़कंप है। उधर आक्रोशित परिजनों ने भीड़ के साथ देर रात जिला महिला अस्पताल में हंगामा किया और तोड़फोड़ की कोशिश की। भीड़ डीआईजी आवास भी पहुंची।
सिविल लाइंस थानाक्षेत्र के गांव लोधीपुर बिशनपुर निवासी मजदूर महेश प्रजापति ने अपनी पत्नी गंगा को रविवार सुबह प्रसव पीड़ा होेेने पर जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। गंगा पर पहले से पांच बेटियां हैं। दोपहर करीब बारह बजे गंगा ने नार्मल डिलीवरी से एक बेटे को जन्म दिया।
जिसके बाद अस्पताल स्टाफ ने जच्चा - बच्चा को लेबर रूम से निकालकर महिला वार्ड में शिफ्ट कर दिया। गंगा के साथ उसकी सास कमला और ननद मिथलेश थीं। घटना दोपहर करीब डेढ़ बजे की है। बहू केे वार्ड में शिफ्ट होने के बाद कमला घर चली गईं। वार्ड में गंगा और नवजात के साथ गंगा की ननद मिथलेश थी।
लेबर रूम के बराबर में स्थित इस वार्ड में करीब दस और महिलाएं भी एडमिट थीं। गंगा उस वक्त बेसुध पड़ी थी। अचानक एक महिला मिथलेश के पास आई और खुद को नर्स बताते हुए कहा कि बाहर किसी ने बताया है कि उसके (मिथलेश के) बेटे का एक्सीडेंट हो गया है। जिसे सुनकर मिथलेश घबरा गई।
इस पर नर्स बनी महिला ने कहा कि वह जाकर अपने बेटे को देख ले नवजात को वह संभाल लेगी। नवजात को इस 50 वर्षीय महिला के सुपुर्द करके मिथलेश चली गई। लेकिन मन में कुछ आशंका होने पर पांच मिनट बाद ही मिथलेश लौटकर वार्ड में आई लेकिन तब तक नर्स बनी महिला नवजात को लेकर गायब हो चुकी थी।
महिला और नवजात को गायब देख मिथलेश के होश उड़ गए उसने शोर मचाया तो अस्पताल स्टाफ भी इकट्ठा हो गया। छानबीन पर पता चला कि नवजात को ले जाते वक्त अस्पताल स्टाफ ने टोका तो महिला ने खुद को आशा बहू बता दिया था। बच्चा चोरी की खबर मिलते ही सिविल लाइंस पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास के बस - टैंपो स्टैंडों पर भी सर्च कराया। लेकिन सुराग नहीं लगा।