सीडीओ के फर्जी हस्ताक्षर से जिन स्कूलों के खातों में 1.95 करोड़ रुपये डाले गए थे वो सभी स्कूल फर्जी निकले। पुलिस जांच में पता चला है कि ये सभी स्कूल महज कागजों में चल रहे थे। इसके बावजूद पिछले कई सालों से इन स्कूलों के नाम पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से वजीफा जाता रहा। एक कलेक्ट्रेट कर्मी का भाई पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह पीपलसाना एरिया में दस से अधिक फर्जी स्कूल और मदरसों का संचालन कर रहा था।
सीडीओ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत बनाकर सरकारी एकाउंट से 1.95 करोड़ रुपये निकाले जाना का सनसनीखेज मामला पिछले दिनों सामने आया था। डीएम जुहैर बिन सगीर द्वारा कराई गई जांच में यह घोटाला उजागर हुआ था। जिसके बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने धर्मानंद भटनागर निवासी पीपलसाना, राहुल कुमार और सुरेंद्र सिंह व एसबीआई के चार बैंक प्रबंधकों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस तफ्तीश में उजागर हुआ है कि धर्मानंद भटनागर पूरे खेल का मास्टर माइंड था और विभागीय अफसरों से उसकी अच्छी बैठ - उठ थी।
पुलिस का कहना है कि धर्मानंद भटनागर और उसके दूसरे भाई ने जिले में दस स्कूल, मदरसे और समितियां खोल रखे हैं। लेकिन ये सभी स्कूल - मदरसे महज कागजों में चल रहे हैं। घर, मकान, और दुकान पर स्कूल के बोर्ड टांगकर पिछले कई सालों से वजीफा डकारा जा रहा है।
हालांकि कागजों में यहां शिक्षक भी तैनात हैं और बच्चों की हाजिरी भी लग रही है। लेकिन हकीकत में मौके पर किसी ने न तो शिक्षकों को देखा न ही बच्चों को। पुलिस का कहना है कि किन्हीं दूसरे स्कूलों के छात्र - छात्राओं के नाम धर्मानंद ने अपने रजिस्टर में चढ़ा रखे हैं। उसने मुरादाबाद जिले में फर्जी स्कूलों का पूरा जाल बिछा रखा है। भोजपुर, पीपलसाना, नाखूनका, कांकरखेड़ा धर्मपुर और मुरादाबाद में स्कूल हैं।