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मझोला में पकड़ा गया साइबर लुटेरों का कॉल सेंटर

Thu, 25 Feb 2016 02:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
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मझोला पुलिस ने साइबर अपराधियों का एक कॉल सेंटर पकड़ा है। जहां 15 से अधिक लड़कियां और करीब इतने ही लड़के जॉब कर रहे थे। साइबर अपराधियों के इस कॉल सेंटर से लोगों को एसबीआई क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर कॉल की जाती थी। यहां से कॉल करके लोगों को क्रेडिट कार्ड एक्सपायर होने का झांसा दिया जाता था।
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तमाम बहानों से लोगों के बैंक खातों की जानकारी जुटाने के बाद यह गैंग ऑनलाइन शापिंग के जरिए लोगों के खातों से रकम उड़ाता था। क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग के जरिए भी खातों से रकम उड़ाई जाती थी। एसएसपी को मिली सूचना के बाद पुलिस ने इस सेंटर पर छापा मारकर दो लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है जबकि मास्टर माइंड समेत बाकी भाग निकले।



साइबर लुटेरों का यह कॉल सेंटर मझोला थाना क्षेत्र में हाईवे किनारे चौधरी चरण सिंह चौक के पास लक्ष्मी ट्रेडर्स के ऊपर दूसरी मंजिल पर चल रहा था। इस फर्जी कॉल सेंटर को रूप सिंह (30) पुत्र राजवीर सिंह निवासी सैदपुर असमोली संचालित कर रहा था। पुलिस के मुताबिक रूप सिंह पिछले करीब दो माह से इस कॉल सेंटर को चला रहा था।
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एसएसपी नितिन तिवारी को मिली एक सूचना के बाद पुलिस ने बुधवार को देर शाम यहां छापा मारा तो मौके से दो युवक और करीब 15 लड़कियां मिलीं। नाम पता नोट करने के बाद लड़कियों को पुलिस ने घर भेज दिया। मौके से पुलिस ने हिमांशु पुत्र वीर सिंह निवासी मानकपुर मैनाठेर और अंकुर पुत्र मदन सिंह निवासी छज्जा नंगला थाना छजलैट को गिरफ्तार कर लिया है।


पुलिस के मुताबिक रूप सिंह ने इसी तरह का एक कॉल सेंटर गांधी नगर में भी खोल रखा है। वहां से भी वह ठगी का धंधा चलाता है। पुलिस ने गांधीनगर में भी छापा मारा। देर रात तक पुलिस पकड़े गए दोनों युवकों को साथ लेकर तमाम स्थानों पर छापामारी कर रही थी।



क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग करते थे
रूप सिंह बेहद शातिराना ढंग से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। कॉल सेंटर पर काम करने वाले लड़के लड़कियों को वह क्रेडिट कार्ड की पूरी सीरीज देकर उनसे टारगेट को कॉल कराता था। कॉल करके किसी को कार्ड एक्सपायर होने का झांसा दिया जाता तो किसी से दूसरे बहानों से डिटेल पूछी जाती।


मकसद बस बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड की अधिक से अधिक जानकारी जुटाना होता था। इसके आगे का काम रूप सिंह और उसके भरोसेमंद साथी करते थे। मिली जानकारी के आधार पर क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग की जाती थी। इसके बाद ऑन लाइन शापिंग करके लोगों के एकाउंट से रकम पार कर दी जाती थी।
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