पीएनबी में 11400 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद बड़े कर्जों को लेकर सभी बैंक सतर्क हो गए हैं। इसका सीधा असर मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। बड़े कर्जों की फाइलें अटक गई हैं। पुराने कर्जों की फाइलें भी बैंक अफसरों ने नए सिरे से खंगालना शुरू कर दी हैं। मुरादाबाद में कई बड़े निर्यातकों ने 100 से 200 करोड़ तक की बैंक लिमिट ले रखी हैं। निर्यातकों को डर है कि पीएनबी घोटाले की वजह से उन्हें बेवजह परेशानी उठानी पड़ेगी।
निर्यातक सतपाल का कहना है कि कमोबेश सभी निर्यातकों ने बैंक से कर्ज ले रखा है। शार्ट टर्म लोन और लिमिट के बगैर बिजनेस नहीं चल सकता। लेकिन पीएनबी घोटाले के बाद बैंकों ने शर्तें कड़ी कर दी हैं। सभी निदेशकों के साइन और प्रापर्टी गिरवीं रखने की शर्तें लग रही हैं। निर्यातक ईमानदारी से बिजनेस करते हैं। लेकिन पीएनबी के दो बड़े घोटालों का सीधा असर मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री पर पड़ रहा है।
पुरानी लिमिट बैंक रिव्यू कर रहे हैं। प्रक्रिया को जटिल बनाया जा रहा है। इस सख्ती से निर्यातकों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि निर्यातक पहले से ही जीएसटी की उलझनों और ड्रा बैक की घटी दरों की वजह से मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। ईपीसीएच के सीओए मेंबर नीरज खन्ना का कहना है कि पीएनबी घोटाले का खामियाजा निर्यातकाें को भुगतना पड़ेगा। बैंक निर्यातकों को कर्ज देने से पहले सौ बार सोचेंगे। खासकर बड़े कर्ज मुश्किल से मिलेंगे।
इसका सीधा असर निर्यात पर पड़ेगा। हालांकि निर्यातक पवन कोठीवाल का कहना है कि एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को कर्ज देने के नियम बैंकों ने पहलेे से काफी सख्त बना रखे हैं। प्रापर्टी गिरवी रखने के बाद ही कर्ज दिया जाता है। इसलिए इस घोटाले का बहुत ज्यादा असर एक्सपोर्ट इंडस्ट्री पर नहीं पड़ेगा।