‘वो जैसे भी थे मेरे पति थे..बेशक मुझे पीटते थे पर मैं उन्हें कैसे मार सकती हूूं। मैंने तो उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की.. भाई से मिन्नतें भी कीं.. लेकिन भैया नहीं माने’। इतना बताते - बताते साधना शर्मा की आंखों से आंसू टपकने लगे। पति की हत्या में जेल के सलाखों में कैद साधना बात करते - करते फ्लैश बैक में चली गईं।
बोलीं,.. वो मुझ पर जान छिड़कते थे, बच्चाें में तो जैसी उनकी जान ही बसती थी.. उनकी परवरिश को लेकर बहुत फिक्रमंद रहते थे। बोलते - बोलते साधना का गला भर्रा गया, कहा- सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन दो साल से उन्हें शराब की लत क्या लगी, पूरी गृहस्थी ही तबाह हो गई।
सलाखों में कैद साधना को अपने बच्चों खुशबू (14) और साहिल (12) की फिक्र खाए जा रही है। पति का कत्ल हो चुका है और वो खुद इसी गुनाह में जेल में बंद है। बच्चों का क्या हाल होगा, कौन उन्हें पालेगा..उनकी पढ़ाई कैसे पूरी होगी। ये सवाल साधना को बेचैन किए हैं।
जेल जाने के बाद से उसने खाना नहीं खाया है। कहती है, मैंने अपने पति को नहीं मारा। मैं क्यों अपने ही हाथों से अपना सुहाग उजाड़ूंगी भला। जो कुछ हुआ वो हालात ने करा डाला। पुरानी यादों में डूबी चालीस वर्षीय साधना बताती हैं कि उनका परिवार पंजाब यहां आकर बसा था। बात करीब बीस वर्ष पुरानी है।
बोली- मैं उन दिनों हरपाल नगर में अपने भाइयों के साथ रहती थी और कोहिनूर तिराहे पर एक एक्सपोर्ट फर्म में काम करने जाती थी। तभी डलब फाटक पुल के नीचे रास्ते में कृष्ण मुरारी उर्फ बबलू पाल से नजरें टकराईं। फिर बबलू ने पीछा करना शुरू कर दिया और एक दिन मन की बात कहकर शादी का प्रस्ताव रखा।
साधना बोली, मैंने शुरू में तो इंकार कर दिया था लेकिन दो साल के अफेयर के बाद दोनों परिवारों की रजामंदी से मनोकामना मंदिर में शादी कर ली। दो साल बाद बेटी खुशबू आई और फिर बेटा साहिल भी आ गया।
अतीत में डूबी साधना कहती हैं कि सबकुछ ठीक से चल रहा था। बबलू की कमाई में दाल रोटी अच्छे से चल रही थी। लेकिन पिछले दो साल से अचानक न जाने क्या हुआ कि बबलू को शराब की लत लग गई। आए दिन घर में झगड़ा होने लगा।
बोली- जो बबूल कभी मेरे ऊपर जान छिड़कते थे वो बात - बात पर मारपीट करने लगे। कभी सब्जी में नमक कम तो कभी ज्यादा.. उन्हें तो जैसे पीटने का बहाना चाहिए था। शनिवार की काली रात को याद कर फफक पड़ी साधना कहती हैं उस रात भी बबलू ने बहुत शराब पी रखी थी और घर आते ही मारपीट शुरू कर दी।
बोली, मैंने तो हालात को स्वीकार कर लिया था, आएदिन पिटाई जैसे मेरी तकदीर बन गई थी। लेकिन पति ने बच्चों के सामने बेरहमी से पीटा तो बच्चों ने अपने मामा मनोज को फोन कर दिया। भैया घर आए तो पति ने उनके सामने भी मुझे पीटा।
साधना बोलीं, नाराज होकर मैं भैया के साथ मायके आ गई, सोचा सुबह तक शराब का नशा उतरेगा तो बबलू आकर खुद बुला ले जाएंगे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। बबलू रात में ही मायके पहुंच गए। नशे में थे और आते ही मारपीट शुरू कर दी।
उन्हाेंने मेरे सिर में पत्थर मार दिया। मैं वहीं गिर गई। इसके बाद भैया ने उन पर हमला कर दिया। वो घायल हो गए। वाकया बताते - बताते साधना की आंखों से आंसू टपकने लगे। बोली, जैसे भी थे मेरे पति थे, मैंने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की। लेकिन भैया गुस्से में थे, वो नहीं माने और उन्हाेंने बबलू की जान ले ली।