कहते हैं तकदीर का लिखा कोई नहीं मिटा सकता। शायद कमल चौहान के हाथों की लकीरों में कुछ ऐसा ही लिखा था, जिसे कोई मिटा नहीं पाया। उसके हाथों दुल्हन के भाई की मौत और फिर अपनी ही रिवाल्वर से उसकी मौत। तभी तो कमल चौहान अपनी चचेरी बहन की शादी छोड़कर बॉस के बेटे के शादी समारोह में पहुंच गया।
उसने चचेरी बहन की शादी में अपने मां-बाप को भेज दिया था। कमल चौहान का परिवार मूलरूप से बिजनौर के पदारसपुर गांव का रहने वाला है। उसके पिता वेदप्रकाश चौहान सेल्स टैक्स विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने अपना मकान गोविंद नगर में बनवा लिया था। जबकि कमल चौहान के चाचा सुरेंद्र सिंह और केहर सिंह गांव में ही रहते हैं।
शुक्रवार को केहर सिंह की बेटी की शादी थी, जिसमें कमल चौहान के पूरे परिवार को शामिल होना था। लेकिन उसी कमल चौहान के बॉस रविश गुप्ता के बेटे पुलक की शादी थी। पुलक की शादी समारोह के अधिकांश कामों की जिम्मेदारी कमल चौहान को ही दे रखी थी।
जिस कारण कमल चौहान अपनी चचेरी बहन की शादी में नहीं गया। पिता वेद प्रकाश चौहान ने बताया कि उस दिन वह अपने भाई की बेटी की शादी में अपने गांव चले गए थे। उस रात में फोन पर घटना की जानकारी हुई थी।