80 साल की बुजुर्ग महिला शकीना उर्फ मुन्नी को मोहल्ले के लोग अम्मा कहकर बुलाते थे। आग लगने पर पड़ोसियों ने उनको बचाने का पूरा प्रयास किया। दमकल विभाग की टीम को फोन किया लेकिन फोन उठा नहीं। कंट्रोल रूम में कॉल करने पर पुलिस आ गई लेकिन दमकलकर्मी सोते रहे। देर रात तक दमकल की टीम वहां पर नहीं पहुंची।
पड़ोसियों ने ही बुजुर्ग महिला को बचाने का प्रयास किया। आग की लपटों के बीच जाने से भी वह न घबराए। पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें अम्मा को न बचा पाने का ताउम्र मलाल रहेगा। मोहल्ले के लोग बुजुर्ग महिला की मौत से दुखी हैं।
पड़ोसियों ने बताया कि ‘अम्मा’ मोहल्ले में रहने वाले बच्चों से बेहद लगाव रखती थीं। रहमतनगर गली नंबर एक में रहने वाले वाले लोग शकीना को अपने परिवार का हिस्सा मानते थे, वह भी मोहल्ले वालों के साथ रहकर खुद परिवार की कमी महसूस नहीं करती थीं। दिन में वह अपने मकान की चौखट पर बैठ जाती और मोहल्ले से गुजरने वाले लोगों से उनका कुशलक्षेम पूछती थीं। बुजुर्ग महिलाएं अक्सर उनके पास बैठकर बातें करती थीं।
मोहल्ले के लोग जब अपने घर खाना खाने के लिए जाते तो वह पहले शकीना के घर जाते और उनके लिए खान-पान का बंदोबस्त करते थे। पड़ोसियों ने बताया कि इन दिनों अम्मा कमजोर हो गई थी, जिस वजह से वह बीमार रहने लगी थीं। देर रात सोते वक्त घर में आग लगी, इसी वजह से वह आग लगने पर खुद का न बचा पाईं।
बीमारी की वजह से उनकी चीखों की आवाज भी घर में ही कैद हो गई। उधर, हादसे के बाद दमकल की टीम के मौके पर न पहुंचने पर सीएफओ विचित्र कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। दमकल कर्मियों की लापरवाही पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।