उपन्यास खरीदने में लोगों की रूचि खत्म होता देख एक लेखक पर उपन्यास लिखने बंद कर ठगी का धंधा शुरू करने का आरोप है। उसे पूर्व में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया लेकिन जेल से छूटने के बाद वह दोबारा से ठगी करने लगा।
लोगों को कागज की गड्डियों को भद्दे नोट बताकर 30 प्रतिशत के दाम पर देकर उन्हें 70 प्रतिशत का लालच देने का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाने का उस पर आरोप है। एसओजी की टीम ने खुद ग्राहक बनकर आरोपी ठग को उसके बेटे और बीकॉम के छात्र के साथ पकड़ा है। आरोपियों से तमंचा, सफेद कागज की गड्डियां, पांच परखनली बरामद की है।
एसपी देहात उदय शंकर सिंह ने बताया कि पकडे़ गए आरोपी सुनील गर्ग उर्फ विक्की निवासी नया गांव एमडीए कालोनी, अनिल सक्सेना और अनिल का बेटा गौरव सक्सेना निवासी गोविंद नगर है। सुनील गर्ग बीकॉम पास है। गौरव (18) दसवीं का छात्र है। अनिल 10वीं पास है। वह पहले उपन्यास लिखता था।
खुद्दार, पत्थर का जवाब गोली जैसे उपन्यास वह पूर्व में लिख चुका है। उसने बताया कि इसके बाद इंटरनेट का दौर शुरू हुआ तो लोगों ने उपन्यास खरीदने बंद कर दिए। वह उपन्यास लिखना बंद कर ठगी करने लगा।
वह दो हजार-पांच सौ के नोटों के बराबर कागज की गड्डियां काटता था, इनमें से कुछ गड्डियों को वह गुलाबी रंग से तो कुछ गड्डियों को हरे रंग से साइड से रंग देता था। गुलाबी रंग से रंगी कागज की गड्डियों पर वह दो हजार का एक नोट और हरे रंग की गड्डियों पर पांच सौ रुपये का नोट रख देता था।
जिनके ऊपर एक रसायन पदार्थ डालकर नोट को वह काला कर देता था। लोगों को बताता था कि उसके पास भद्दे नोटों की गड्डियां हैं, जिसे वह 30 प्रतिशत की कीमत पर बेचने को तैयार है।
इन नोटों को नमक के पानी से धोने पर नोट ठीक हो जाएंगे। 70 प्रतिशत का मुनाफा होने पर लोग आसनी से कागज की गड्डियों को अनिल व उसके साथियों से 30 प्रतिशत पर ले लेते थे। घर जाकर जब वह नोट चेक करते थे तो वह कागज की गड्डियां निकलती थीं। एक सूचना पर एसओजी टीम ने मझोला पुलिस के साथ मिलकर आरोपी को खुद ग्राहक बनकर गिरफ्तार किया है।