फर्जी आईजी बनकर तीन माह से पुलिस वालों की आंखों में धूल झोंककर उनसे सुविधाएं हासिल कर रहे वकील राजीव शर्मा को जीआरपी ने जेल भेज दिया। उसके खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुजफ्फरनगर का रहने वाला पेशे से वकील राजीव शर्मा फर्जी आईजी बनकर रौब गांठ रहा था।
ट्रेन में रिजर्वेशन, सफर के दौरान खाना उपलब्ध कराना, होटल में कमरा बुक कराना, घूमने के लिए पुलिस से ही प्राइवेट कार बुक कराने का काम कराया। इतना ही नहीं होटल में ठहरने के दौरान शराब का भी इंतजाम भी पुलिस से कराया। रविवार को ये फर्जी आईजी जीआरपी के हत्थे चढ़ गया।
मामला उसवक्त खुला जब राजीव शर्मा ने जीआरपी वालों से टिकट बुक कराने को कहा और अपने आपको उत्तराखंड का आईजी ट्रेनिंग पीवीके प्रसाद बताया। एसपी जीआरपी ने जब पूछताछ की तो सारा मामला खुलकर सामने आ गया। जीआरपी ने उसके खिलाफ सरकारी कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी, सरकारी सेवाओं का पद पर न रहते हुए अनुचित तरीके से लाभ उठाने सहित छह धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जिनमें दो धाराएं गैर जमानती है। सोमवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
राजीव के पिता रह चुके हैं इंस्पेक्टर
फर्जी आईजी बनकर रौब गांठने वाले राजीव शर्मा के पिता पुलिस इंस्पेक्टर रह चुके हैं। उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी अच्छी है। कभी वह भी पुलिस अधिकारी बनना चाहता था, लेकिन वकील बनकर की गुजर बसर कर रहा है। लेकिन पुलिस के रौब की सनक उसके सिर पर चढ़ी हुई थी। जिसके चलते उसने ये हरकत की। इससे पहले भी वह कई बार ऐसे ही काम कर चुका है। लेकिन इस बार लगातार पुलिस वालों पर दबाव बनाने के कारण पकड़ में आ गया। उसके रिश्तेदार मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं।