पुलिस या जांच एजेंसी किसी भी राज्य की हो, जांच के दौरान कई बार खामियां रह जाती हैं। इसका नतीजा देश की चर्चित घटनाओं में शामिल प्रद्युमभन और आरुषि-हेमराज हत्याकांड जैसा होता है। जिसमें कई बार न केवल जांच पर सवाल उठते हैं, बल्कि बेकसूरों को जेल तक जाना पड़ता है।
ऐसी खामियों से बचने के लिए पंचायत भवन में पांच जिलों की पुलिस को विवेचना में सुधार के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया। जिसमें पुलिसकर्मियों ने एकजुट होकर कहा कि अब विवेचना ऐेसी की जाएगी, जिसमें कोई बेकसूर जेल न जाए।
शनिवार को पंचायत भवन में कार्यशाला की शुरूआत डीआईजी ओंकार सिंह ने उदघाटन कर की थी। दो दिन की कार्यशाला के दौरान विवेचनाधिकारियों सहित कार्यक्रम में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों को आपराधिक मामले में आरोपी के खिलाफ एकत्रित किए जाने वाले साक्ष्यों के बारें जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में एडीजे-11 संजीव कुमार त्यागी ने पुलिसकर्मियों को मानवाधिकार के बारे में जानकारी दी। एसपी देहात उदय शंकर सिंह ने सीसीटीएनएस के बारे में जानकारी दी। सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक हाकिम राय ने विवेचना के सिद्धांतों के बारे में जानकारी दी।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के प्रोफेसर यूएस सिन्हा ने घायलों के चोटों का विवेचना में मूल्यांकन करना, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विवेचनात्मक कार्यवाही में मूल्यांकन करना। सेवानिवृत अपर निदेशक अभियोजन शशिकांत शर्मा ने विवेचनाओं के संबंध में वैज्ञानिक प्राविधान की जानकारी दी।
एसपी ट्रैफिक सतीश चंद्र ने बताया कि कार्यशाला के दौरान करीब ढ़ाई सौ पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, संभल और बरेली के पुलिस अधिकारी मौजूद थे।