व्हाट्सएप स्टेटस पर पाकिस्तान जिंदाबाद लिखने पर हुए बवाल के बाद एमआईटी प्रबंधतंत्र ने कश्मीरी छात्रों के दाखिलों पर प्रतिबंध लगा दिया है। संस्थान में कश्मीर के जो भी छात्र इस समयअध्ययनरत हैं वह अपना सत्र पूरा करेंगे। भविष्य में कश्मीर के छात्रों का कोई नया दाखिला नहीं होगा।
रविवार को कालेज प्रबंधतंत्र एवं जांच कमेटी ने मुजस्सम गनी को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार होने के कारण कोर्ट के आदेश तक कालेज से निष्कासित कर दिया है। रविवार को जांच समिति की बैठक के बाद निदेशक डॉ. भानु प्रताप सिंह ने बताया कि रफी फारूख के अलावा चार कश्मीरी छात्रों का प्रवेश हुआ था, जिसमें से एक छात्र बीच में अपनी पढ़ाई छोड़ गया। शेष तीन छात्र अध्ययनरत हैं। यह छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे, लेकिन आगामी सत्र में प्रवेश प्रक्रिया में कश्मीरी छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार की योजना से कालेज में प्रवेश लेने वाले कश्मीरी छात्रों को दिए जाने वाले विकल्प को बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश पहले है, प्रवेश बाद में हैं। स्थानीय छात्र किसी भी बाहरी व्यक्ति के बहकावे में न आए, इसके लिए काउंसलिंग सेल को सक्रिय कर दिया गया है। अब नियमित रूप से छात्रों की काउंसलिंग के साथ-साथ उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। रफी फारूख के खिलाफ गहनता से जांच के लिए समिति भी बनाई गई है। जिसमें सिविल विभाग के तकनीकी निदेशक डा. प्रोफेसर अमिताभ घोष, निदेशक फार्मेसी विभाग डा. सुधांशु रंजन स्वाइन, अकादमी डीन विकास मित्तल हैं। इसमें देश विरोधी गतिविधियों की सत्यता के लिए फेसबुक और वॉट्सएप के अलावा छात्रों की शिकायतों को संज्ञान में लिया जाएगा। इस बैठक में निदेशक डॉ. भानु प्रताप सिंह के साथ-साथ छात्र कल्याण के डीन डॉ. प्रो. विजेंद्र सिंह व फार्मेसी विभाग के प्रभारी डॉ. सुधांशु रंजन स्वाइन आदि थे।