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जेल में रची सुनीता की हत्या की साजिश

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मुरादाबाद।
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संपत्ति विवाद के साथ-साथ चार साल की जेल कराने के प्रतिशोध को भी सुनीता की हत्या की वजह मानी जा रही है। इसी जून में अदालत से सजा होने के बाद आरोपी ससुर घलेंद्र और सुनीता के देवर राम बहादुर 20 दिन पहले हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर जेल से रिहा हुए हैं। सुनीता की हत्या की साजिश जेल से छूटने से पहले ही आरोपियों ने रची थी। रिहा होते ही वह योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम देने की फिराक में लग गए। सिर्फ हत्या ही नहीं बल्कि वारदात के बाद अपने नए ठिकाने की व्यवस्था भी उन्होंने कर ली थी।
सुनीता की बेटी प्रियंका ने बताया कि जेल से निकलते ही पहले बाबा ने अपने पशुओं को बेच दिया। इसके बाद घर से कीमती सामान भी दूसरी जगह ले गए। वारदात को तीन दिन बीत गए हैं लेकिन पुलिस एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। अब तक आरोपियों के नए ठिकाने का भी पुलिस को पता नहीं चला है, उनकी रिश्तेदारियों में पुलिस की टीमें रामपुर, संभल सहित अन्य जगहों पर दबिश दे चुकी हैं लेकिन उनका अता पता नहीं चला है। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज सुनीता की बेटी ने पुलिस को आठ दिन का समय दिया है। उसका कहना है कि अगर आठ दिन के अंदर सभी आरोपी जेल में नहीं हुए तो वह खुद एसएसपी से मिलेगी। उसने बताया कि वारदात के वक्त घर में लाइट जल रही थी, जिसकी रोशनी में आरोपियों को पहचाना है। बाबा घलेंद्र उसकीमां के पैर पकडे़ हुए थे। चाचा राम बहादुर, कुंवरपाल और मुंह पर ढाटा बांधे युवक ने गोलियां मारी है। ढाटा बांधने वाला व्यक्ति भी गांव का रहने वाला होेने की आशंका व्यक्त की है। प्रियंका का कहना है कि रात को नौ बजे उसके बाबा के घर पर गांव का ही एक व्यक्ति आया था। वह उसकी दादी से बात कर रहा था। इसके बाद वह घर से चला गया। इसके बाद रात को जब वह सुनीता सो गई तो आरोपी घर में वारदात के लिए घुसे और वारदात को अंजाम देकर भाग गए।
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पोती की गवाही पर हुई थी बाबा-चाचा को सजा
मुरादाबाद।
मूंढापांडे की सुनीता के मुकदमें में बाबा और तीन चाचा को 12 साल की प्रियंका की बेबाक गवाही पर ही 12 जून को सजा हुई थी। उम्र में छोटी और लंबाई कम होने के कारण फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफएसटी) प्रथम की न्यायाधीश संध्या चौधरी को दिखाई नहीं दे रही थी। ऐसे में कुर्सी पर खड़ा करके उसके बयान लिए। बयान में प्रियंका ने बयान में बाबा घलेंद्र सिंह, चाचा समरपाल, राम बहादुर और आनंद पाल पर घर में घुसकर मां सुनीता को जमकर लात घूंसों से मारने -पीटने का आरोप लगाया । गाली-गलौच की और कहा था कि तेरा बंश नहीं चलने देंगे। पेट में पल रहे बच्चे को भी मार डालने की धमकी दी। इस दौरान विरोधी पक्ष के वकीलों ने काफी सवाल किए लेकिन वह उन सवालों का बेबाक जवाब देती रही। एफएसटी प्रथम के न्यायाधीश ने प्रियंका केबयान का हवाला देते हुए सजा का आदेश सुनाया था।
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इस मुकदमे की पैरवी कर रहीं सरकारी अधिक्ता रेशमा परवीन ने बताया कि सुनीता की हालत उन दिनों बहुत खराब थी। नवंबर 2011 में सुनीता की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे को बेटी के बयान से मुकदमे को काफी मजबूती मिली थी। उसी का हवाला देकर अदालत ने बाबा और तीन चाचा को चार-चार साल की सजा सुनाई थी। साथ में 21-21 हजार रुपये का अर्थदंड इन चारो बेटियों को देने के आदेश भी किए थे लेकिन अर्थ दंड की राशि अभी तक बेटियों को नहीं मिली है।
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