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हत्या और डकैती में आठ दोषियों को दस दस साल की कैद

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मुरादाबाद।
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बिलारी के बीस साल पुराने हत्या- डकैती के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश शशि कांत शुक्ल की अदालत ने आठ मुलजिमों को दोषी करार देते हुए दस- दस साल की कैद और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है, जबकि केस की सुनवाई के दौरान दो मुलजिमों की मृत्यु हो चुकी है।
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जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने बताया कि आठ मार्च 1998 को बिलारी थाने में रुस्तम नगर सहसपुर निवासी महिला बानो ने बिलारी थाने में दस लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। महिला ने बताया था कि आरोपी इसहाक, नवाब, साबिर, लईक, नन्हू, रफीक, नाजिर, नसीर, लियाकत और रहीश निवासी गण रुस्तम नगर सहसपुर उसके घर में लूटपाट करने घुस आए। पूरे परिवार को कब्जे में लेकर मारपीट शुरू कर दी। बदमाशों ने गोली मारकर उसके पति मो. नबी की हत्या कर दी और बेटे मो. शफी व अन्य परिजनों को गोली मारकर घायल कर दिए। पुलिस ने इस मामले में तफ्तीश पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस केस की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश शशि कांत शुक्ल की अदालत में चली। बीस साल चली इस केस की सुनवाई के दौरान इसहाक और नसीर अहमद की मृत्यु हो चुकी है। सरकार की ओर से अदालत में डीसीसी क्रिमिनल संजीव कुमार सिंह और एडीजीसी संजीव अग्रवाल ने रक्षा और मुलजिमों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए दलीलें दी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने मुलजिमों की आयु 80 वर्ष से अधिक का हवाला देकर कम से कम सजा की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने, मेडिकल रिपोर्ट व प्रस्तुत तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मुलजिमों को दोषी करार देते हुए सभी को दस दस साल की कैद और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा है कि जमा जुर्माना की धनराशि मृतक मो. नबी की पत्नी को 75 प्रतिशत धनराशि दिया जाना न्यायसंगत है।
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