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प्रवेश पत्र में ही झोल आया सामने

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मुरादाबाद।
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सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा के लिए परीक्षार्थियों की ओर से भरे गए परीक्षा फार्म की जांच किए बिना ही प्रवेश पत्र जारी कर दिया गया था। सॉल्वर गिरोह के जो दो सदस्य पकडे़ गए हैं, उनके पास से जो प्रवेश पत्र बरामद हुए है। उसमें नाम तो उस व्यक्ति का है, जिसकी जगह वह परीक्षा दे रहे हैं लेकिन फोटो सॉल्वर गिरोह के सदस्य का है। अगर पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना नहीं मिलती तो सॉल्वर गिरोह के सदस्य परीक्षा देने में सफल हो जाते।
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परीक्षा फार्म कई महीने पहले भरे गए थे, इन परीक्षा फार्म की अगर जांच की गई होती तो सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ पहले ही हो सकता था। ऐसे परीक्षा फार्म निरस्त किए जा सकते थे, जिसमें असली परीक्षार्थी का फोटो चस्पा नहीं किया गया था। परीक्षा फार्म की जांच नहीं किए जाने की वजह से प्रवेश पत्र भी परीक्षार्थियों की ओर से भरे गए परीक्षा फार्म के आधार पर ही जारी किए गए। रविवार को जब असली परीक्षार्थी की जगह पर सॉल्वर गिरोह के सदस्य परीक्षा देने के लिए पहुंचे तो उन्होंने वही प्रवेश पत्र पुलिस को दिखाए। पुलिस ने परीक्षा देने के लिए आए व्यक्ति का और प्रवेश पत्र पर अंकित फोटो का मिलान किया तो दोनों मैच हो गए। नाम पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम प्रवेश पत्र पर अंकित परीक्षार्थी का नाम बताया। पुलिस को यकीन दिलाने के लिए आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र भी प्रवेश पत्र के नाम के आधार पर बनवाए थे। इस तरह से सॉल्वर गिरोह ने वह सुरक्षा चक्र तोड़ दिया, जिसे उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तैयार किया था। सॉल्वर गिरोह के सदस्य परीक्षा देने के लिए क्लासरूम में जा पहुंचे और परीक्षा देने लगे। एसपी सिटी अंकित मित्तल ने बताया कि सॉल्वर गिरोह के सदस्य परीक्षा देने में सफल भी हो जाते लेकिन मुखबिर से सूचना मिलने पर उनकी चेकिंग की गई तो वह दोनों गिरफ्तार हो सके। ऐसे में अंदेशा है कि कई सॉल्वर परीक्षा देने में सफल हो गए हैं।
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