हरिद्वार केरुड़की में नकली दवा बनाने वाले देश-विदेश केनामचीन ब्रांडों के बैच नंबर की भी नकल कर रहे थे। दवा क्षेत्र की 50 से ज्यादा नामचीन कंपनियों के ब्रांड पकड़े गए हैं। इनमें कैंसर से लेकर हार्ट व मेजर इंफेक्शन तक की दवाइयां शामिल हैं। दवा बनाने के लिए ये रंग और फ्लेवर विदेशों से मंगवाते थे। सरकार ने नकली दवाओं की भरमार को देखते हुए अलर्ट जारी कर लोगों को पक्का बिल लेने की सलाह दी है।
रुडकी में बनाई जा रही दवाओं को देखने, छूने, रैपर पढ़ने और खाने पर नकली होने का पता नहीं चलता। जन सामान्य को ही नहीं, चिकित्सक, ड्रग इंस्पेक्टर और कई साल से लगातार दवा खा रहे रोगी भी असली-नकली की पहचान नहीं कर सकते। नकली दवा बनाने वालों ने संबंधित कंपनियों के बिल्कुल असली जैसे ही पैकिंग रैपर , दवाओं का रंग और स्वाद देने वाला फ्लेवर लगा रखा था। ये नकली दवा बनाते समय बैच नंबर भी वही प्रयोग करते थे, जो असली कंपनी द्वारा प्रयोग किया जाता था। दवा बनाने को अत्याधुनिक मशीन लगाने के साथ ही विदेशों से रंग और फ्लेवर मंगवा रहे थे। यही कारण था कि बिना साल्ट बेस के बनाई जा रही नकली दवा कई साल से असली की तरह से ही चल रही थी। नकली दवाओं में कैंसर, हार्ट, किडनी, लीवर और संक्रमण की ऐसी दवाइयां शामिल हैं, जिनकी बिक्री ज्यादा होती है। ऐसे में असली केसाथ ही नकली दवा का भी बड़ा कारोबार फैला हुआ है। यही कारण है कि इसका स्टाक करने वाले के पास तीन करोड़ से ज्यादा की दवा मिली थी।
औषधि आयुक्त एकेजैन ने बताया कि अलर्ट जारी कर बिना बिल के दवा न खरीदने-बेचने की अपील की गई है। इसकेसाथ ही प्रदेश में बड़े स्तर पर सैंपल लेने को अभियान चलाया जाएगा।
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पकड़ी गई दवाओं के ब्रांड का सैंपल लेने को चलेगा अभियान
शासन ने दवाओं के सैंपल लेने को अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। जिन कंपनियों और ब्रांडों की नकली दवा पकड़ी गई हैं, उनकी बाजार में उपलब्ध सभी दवाओं के सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। ड्रग इंस्पेक्टर नरेश मोहन दीपक ने बताया कि मेडिकल स्टोर संचालकों को भी सलाह दी गई है कि वह बिना पक्के बिल के न तो कोई दवा खरीदें और न ही बिक्री करें। जरा सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है।
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