मुरादाबाद। 14 साल के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। स्कूल प्रबंधन की इस बात सही मान भी लिया जाए कि उसे धक्का नहीं दिया गया बल्कि वह खुद तीसरी मंजिल से कूदा था। तो भी स्कूल में कुछ तो ऐसा जरूर हुआ जिसने एक हंसते - खेलते छात्र को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। स्कूल प्रबंधन छात्र के साथ मारपीट की घटना से भी इंकार कर रहा है। लेकिन इस बात का जवाब किसी के पास नहीं कि यदि सबकुछ ठीक था तो सुबह सही सलामत घर से निकले नूर ने तीन घंटे बाद ही स्कूल में आत्महत्या क्यों कर ली।
नूर आलम के पिता का कहना है कि सुबह के करीब नौ बजे थे। उनके पास क्लास टीचर राजकुमार का फोन आया था। बकौल मशकूर क्लास टीचर ने उनसे पूछा कि, क्या आपने अपने बेटे को किताबें नहीं दिलवाई हैं? उन्होंने बताया कि अब तक स्कूल ने किताबें फाइनल नहीं की है, जिस वजह से अभी किताब नहीं दिलवाई है। मशकूर ने बताया कि महाराजा अग्रसेन स्कूल से ही बडे़ बेटे फरमूद ने साइंस साइड से पढ़ाई की है, जिसकी वजह से उसकी किताबें भी घर पर रखी हैं। उन किताबों में से जो भी नूर आलम के पाठयक्रम में होंगी, वह खरीदने की जरूरत नहीं होगी। दो किताबों के खरीदने लिए पैसे भी नूर आलम को दे चुका हूं। फिर टीचर ने पूछा कि क्या किताब में छेद नूर आलम की मां ने किए हैं तो मशकूर ने ये कहते हुए मना कर दिया कि उसकी मां अस्पताल में भर्ती थी, उनका आपरेशन हुआ है। इस वजह से नहीं लगता कि किताब में जिल्द चढ़ाने के लिए उन्होंने किताब में छेद किए हैं। फिर मशकूर हुसैन ने पूछा कि आप ऐसा क्यों पूछ रहे हो तो टीचर ने बताया कि एक किताब को लेकर नूर आलम और उसकी क्लास का ही एक बच्चे के बीच विवाद हो गया है। दोनों ही किताब को अपना बता रहे हैं। इसके बाद टीचर ने कहा कि फिलहाल किताब को अपने पास रख लिया है, आप शाम को इस संबंध में बेटे से बात कर लेना। मशकूर हुसैन ने बताया कि उस वक्त वह काम पर गए थे, इस वजह से बेटे फरमूद को स्कूल भेजा ताकि मामले का पता चल सके। स्कूल से बेटे ने फोन कर बताया कि उसने मसला हल कर दिया है, किताब को दूसरा बच्चा अपनी बता रहा था तो किताब उसी को दे दी है।
मशकूर ने कहा कि फिर न तो अपने बेटे नूर आलम से बात की, न ही उसे किसी प्रकार की डांट लगाई। फिर वह आत्महत्या क्यों करेगा। बोले, जांच से ही पता चलेगा कि उनके बेटे के साथ स्कूल में आखिर ऐसा क्या हुआ था कि उसने जान दे दी। मशकूर हुसैन का कहना है कि अगर उनके बेटे ने किसी प्रकार की गलती की थी तो स्कूल वाले उसकी टीसी काट देते, उसका एडमिशन कैं सिल कर देते लेकिन उसको टॉर्चर नहीं करते, कम से कम वह जिंदा तो रहता। बेटे को याद कर रो रोकर पूरे परिवार का बुरा हाल है। उनकी जुबां पर एक ही सवाल है कि जब बडे़ बेटे ने मसला हल कर दिया था कि आखिर स्कूल में नूर आलम पर क्या जुल्म किया गया, जिसकी वजह से उसकी जान गई।
‘मेरा बेटा भूखा ही दुनिया से चला गया’
मुरादाबाद। मूलरूप से छजलैट थानाक्षेत्र के सराय खजूर में रहने वाले पेंटर मशकूर हुसैन ने बताया कि परिवार में उनकी पत्नी शाहिन, तीन बेटे फरमूद, खुशनूद, नूर आलम (मृतक) और बेटी महक है। बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ें, उनको कोई दिक्कत न हो। इस वजह से गांव छोड़कर शहर आए थे लेकिन इस स्कूल ने ही उनके बच्चे की जान ले ली, वह कह रहे थे कि नूर आलम बहुत ही हंसमुख था, उसके साथ ऐसा क्यों हुआ? मशकूर हुसैन ने बताया कि सुबह उनका बेटा भूखा ही स्कूल गया था। शाहिन का आपरेशन होने के कारण वह खाना नहीं बना सकी थी। रोते हुए कहते हैं कि बेटा भूखा ही दुनिया से चला गया।
किताब वापस कर दी फिर क्यों ले ली भाई की जान
मुरादाबाद। दूसरी तरफ छात्र के भाई फरमूद का कहना है कि वह भी नहीं जानता कि स्कूल में ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से उसके भाई की जान चली गई। वह तो उससे आखिरी बार मिल भी नहीं सका, शुक्रवार को दो बार स्कूल गया लेकिन नूर आलम को उसने एक बार भी नहीं देखा। वह भी चाहता है कि उसके भाई की मौत के जिम्मेदार जो भी लोग हों, उनको कड़ी से कड़ी सजा मिले।
किताब वापस लेने पर शांत हो गया था नूर
मुरादाबाद। नूर आलम के क्लास टीचर राजकुमार ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि पहले पीरियड में ही क्लास में एक बच्चे ने बताया कि उसकी दो किताब जो कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री की है, किसी ने चोरी कर ली है। इसके बाद उसकी किताब के बारे में जानकारी करने के लिए बच्चों के बैग चेक किए गए, जिसके बाद नूर आलम के बैग से बायोलॉजी की किताब निकली। किताब को लेकर नूर आलम और दूसरे बच्चे के अपने अपने तर्क थे। दूसरे बच्चे ने बताया कि किताब में जिल्द हटाए जाने के निशान हैं और उसके द्वारा लगाए गए निशान भी मौजूद हैं जबकि नूर आलम ये कह रहा था कि किताब उसकी है, नई खरीदी है। किताब पर नाम नहीं लिखा था। जब नूर के भाई फरमूद ने स्कूल आकर इसकी पुष्टि की कि किताब नूर आलम की नहीं है तो किताब दूसरे बच्चे को दे दी गई। किताब देने के वक्त नूर आलम ने विरोध जताया और कहा कि किताब उसकी ही है। नूर आलम को यह नहीं बताया गया था कि उसका बड़ा भाई स्कूल में आया है। इसके कुछ देर बाद जब फरमूद केमिस्ट्री की किताब भी लेकर स्कूल आया। यह किताब भी चौथे पीरियड में दूसरे बच्चे को दे दी गई। उस वक्त नूर आलम ने विरोध नहीं जताया। वह शांत बैठा रहा। तब शिक्षक अरुण क्लास में पढ़ा रहे थे। उन्होंने भी उस नूर आलम को ये नहीं बताया कि किताब उसके भाई ने घर से लाकर दी है। हालांकि टीचर ये आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि शायद दूसरी किताब के स्कूल में पहुंचने से नूर आलम को ये आभास हो गया कि मामला उसके घर तक पहुंच गया है।
कुछ देर बाद ही मचा नूर आलम के लटकने का शोर
मुरादाबाद। दूसरी किताब वापस करने के कुछ मिनट बाद ही इंटरवल हो गया था। टीचर अरुण ने बताया कि इंटरवल में अन्य बच्चों की तरह नूर आलम भी क्लास से बाहर निकला। वह अन्य बच्चों के साथ क्लास में ही लंच कर रहे थे। तभी शोर सुनाई दिया कि नूर आलम तीसरी मंजिल पर लटका हुआ है। टीचर अरुण का कहना है कि वह बाहर की ओर भागे, उन्होंने देखा कि नूर आलम तीसरी मंजिल से लटका था और टीचर विवेक उसे बचाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन कुछ ही सेकेंड में नूर आलम नीचे गिरा, तेज आवाज हुई। उसको चोट लगी, तो स्कूल स्टाफ उपचार के लिए उसे अस्पताल ले गया।
अफसोस मैं उसे बचा नहीं सका: विवेक
मुरादाबाद। टीचर विवेक ने बताया कि वह घटना के समय छात्राओं के साथ क्लास में बैठे थे। अचानक शोर मचा तो वह बाहर की ओर भागे। छात्र को बचाने के लिए पहले उन्होंने प्रयास किया, ग्रिल में लगभग आधे शरीर तक वह लटके तब जाकर किसी तरह से नूर आलम के हाथ तक उनका हाथ पहुंच सका था, उस वक्त नूर आलम उनकी तरफ आस भरी नजरों से देख रहा था, विवेक कहते हैं कि उन्होंने महसूस किया कि नूर आलम को लग रहा था कि वह उसको बचा लेंगे, उन्होंने प्रयास भी किया लेकिन ये मुमकिन न हो सका।
जब तक दरी खोलते वो नीचे गिर चुका था: प्रिंसिपल
मुरादाबाद। प्रिंसिपल रश्मि ठाकुर का कहना है कि वारदात के वक्त वह आफिस में बैठी थी। शोर सुनकर वह बाहर आई तो छात्र को लटका देख सहम गई। उन्होंने शोर मचाया और स्टाफ से नूर आलम को बचाने के लिए गुहार लगाई। जब विवेक वहां पर नूर आलम को बचाने का प्रयास कर रहे थे तो उनको आस थी कि वह बचा लेंगे। दूसरा स्टाफ नीचे दरी लेकर आया ताकि नीचे गिरने पर उसे बचा सकें। लेकिन जब तक दरी खुलती तब तक नूर आलम नीचे गिर चुका था। बोलीं, घटना इतनी दुखद है जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
छात्राओं के फ्लोर पर कैसे पहुंचा नूर, लापरवाही उजागर
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। जिस तीसरी मंजिल से गिरकर नूर आलम की मौत हुई है। वहां पर छात्राओं का ही प्रवेश था, वहां पर छात्रों का जाना स्कूल प्रशासन ने मना कर रखा है। इसके बावजूद वहां पर नूर आलम का पहुंच जाना और उसे किसी सिक्योरिटी गार्ड, टीचर या स्कूल प्रबंधन द्वारा न रोका जाना लापरवाही को उजागर करता है। इस मामले में नूर आलम के पिता मशकूर हुसैन का कहना है कि कदम कदम पर लापरवाही की गई है। जिस तरह से उनको ये बताया गया कि उनका बेटा ग्रिल के पास लटका हुआ था, क्या उस वक्त स्कूल में ऐसा कोई इंतजाम स्कूल प्रशासन नहीं कर सका, जिससे की उनके बेटे की जान बच सकती है। इसके अलावा बरबलान मोहल्ले में इस घटना के बाद लोग स्तब्ध हैं। कई लोग मशकूर को सांत्वना देने पहुंचे और उन्होंने बताया कि प्राइवेट स्कूलाें की मोटी फीस होने के बाद भी बच्चों को इस वजह से वहां पर भेजा जाता है, ताकि वह सुरक्षित रहें लेकिन नूर आलम के साथ जो कुछ हुआ। उससे प्राइवेट स्कूलों में भी छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा गहरा गया है। वह चाहते हैं कि आरोपी जो भी उसको कड़ी सजा मिले, इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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जाम लगाने का भी हुआ प्रयास
मुरादाबाद। शुक्रवार को जब पोस्टमार्टम के बाद नूर आलम का शव बरबलान पहुंचा तो वहां पर जाम लगाने का प्रयास किया गया लेकिन पुलिस ने वहां पर पहुंचकर कार्रवाई का आश्वासन दिया तो लोग मान गए।
ई-रिक्शा में ले जाया गया नूर आलम को
मुरादाबाद। नूर आलम को स्कूल से ई-रिक्शा में ले जाया गया, वह लहूलुहान था। प्रिंसिपल रश्मि का कहना है कि गलियां तंग हैं, वहां पर बड़ी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। इस वजह से ई-रिक्शा में नूर आलम को थोड़ी दूर ले जाया गया था, रास्ते में एंबुलेंस मिली तो उसमें नूर आलम को रखकर अस्पताल पहुंचाया गया।
अभिभावक भी स्तब्ध
मुरादाबाद। वारदात लंच के समय हुई, उस वक्त कई बच्चों के परिवार वाले लंच देने के लिए स्कूल पहुंचे थे। उनको जब वारदात के बारे में जानकारी हुई तो वह स्तब्ध हो गए।