जेल भूमि घोटाले में जिले के एक पूर्व डीएम के खिलाफ प्राथमिक जांच में साक्ष्य आने के बाद जांच विजिलेंस आईजी को सौंप दी गई है। अभी तक इस मामले की जांच एसपी विजिलेंस बरेली के पास थी। घोटाले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम आने के बाद एसपी के अनुरोध पर जांच आईजी विजिलेंस को दे दी गई है। जेल के लिए भूमि खरीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी। इससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
नई जेल के लिए भूमि खरीद में अफसरों और कुछ प्रापर्टी डीलरों की मिलीभगत से सरकार को चूना लगाने का खुलासा पहले ही हो चुका है। इसमें शहर के एक होटल संचालक का नाम भी शामिल है। एक अधिवक्ता द्वारा की गई शिकायत के बाद शासन ने एमडीए के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग भूमि को छोड़ने और जेल भूमि खरीद के मामले में विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। एसपी विजिलेंस बरेली ने मामले की जांच की तो एक के बाद एक कई अधिकारियों की भूमिका घोटाले में उजागर हुई। प्राथमिक जांच में आरोपों में दम नजर आने के बाद शासन ने विजिलेंस को विस्तृत जांच का आदेश दिया था। एसपी विजिलेंस द्वारा की गई जांच में मुरादाबाद सदर तहसील में तैनात रहे एक एसडीएम, दो तहसीलदार और लेखपालों के साथ ही एक पूर्व डीएम की भूमिका भी घोटाले में उजागर हुई है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने बताया कि एसपी विजिलेंस प्रकरण की जांच कर रही थीं। लेकिन किसी वरिष्ठ अधिकारी का नाम प्रकाश में आने के बाद उन्होंने शासन से अनुरोध किया था कि जांच किसी सीनियर अफसर से कराई जाए। शासन ने जेल भूमि प्रकरण की जांच अब आईजी विजिलेंस को सौंप दी है। एडीएम ने बताया कि विजिलेंस को जांच में सहयोग किया जा रहा है। जो भी पेपर या विवरण विजिलेंस को चाहिए वह उन्हें उपलब्ध कराया जा रहा है।