एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्र सरकार के बजट पर लोगों की निगाहे टिकी हुईं हैं। अधिकांश लोग चाहते हैं कि अब तो केंद्र सरकार पांच लाख रुपये सालाना की आमदनी वाले व्यक्तियों को टैक्स के दायरे से बाहर करे। क्योंकि सरकार आठ लाख रुपये सालाना आमदनी वालों को गरीब सवर्ण मान चुकी है। उसी आधार पर उन्हें सवर्ण आरक्षण प्रदान करने का आदेश जारी कर दिया है।
जिले में सरकारी, अर्द्ध सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों की संख्या करीब एक लाख है। सभी यही उम्मीद लगा रहे हैं कि इस बार तो केंद्रीय वित्त मंत्री को आयकर की सीमा पांच लाख कर देनी चाहिए। इतना ही नहीं 80 सी के अंतर्गत भी टैक्स में छूट डेढ़ लाख के स्थान पर दो लाख रुपये होनी चाहिए। इन लोगों को यह भी उम्मीद है कि बैंक में जमा धनराशि पर 10 हजार रुपये की ब्याज के स्थान पर 50 हजार रुपये से ऊपर ब्याज मिलने पर ही टीडीएस की कटौती होनी चाहिए। संबंधित व्यक्ति को यह भी जानकारी मिलनी चाहिए कि उनका टीडीएस काट लिया गया है। अब तक लोगों को ऐसी जानकारी बैंक और बीमा कंपनियों से नहीं मिल रहीं हैं। सरकारी कर्मचारी चाहते है कि जीपीएफ और ईपीएफ में कर्मचारी के बराबर सरकार का भी योगदान होना चाहिए।
कर्मचारी के वेतन से जितनी कटौती होती है, ईपीएफ में सरकार का भी उतना ही योगदान होता है। इस पर ब्याज आठ फीसदी की जगह दोबारा से 12 फीसदी होनी चाहिए।
श्रुति सिरोही, जीसीआई एनसीसी
आठ लाख तक की आय वाले सवर्ण गरीबी के दायरे में शामिल हो सकते हैं तो पांच लाख की आमदनी वाले टैक्स के दायरे से बाहर होनी चाहिए
शहला जमील, शिक्षक
कामकाजी महिलाओं की टैक्स स्तर बढ़ना चाहिए। स्लैब में परिवर्तन आना चाहिए। सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्सन 40 हजार का बनाया है, वह एक से डेढ़ लाख रुपये करना चाहिए।
डॉ. प्रियांशा सिंह, शिक्षक
गुणवत्ता वाले कास्मेटिक सामान पर लगने वाला जीएसटी बहुत ज्यादा है। ग्राहक इतना देना नहीं चाहते हैं। घटिया हम इस्तेमाल नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे भरोसे की बात है। जीएसटी कम होनी चाहिए।
एकता जैन, ब्यूटीशियन।