10 करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रेजरी घोटाले में एक के बाद एक सरकारी कर्मचारियों की भूमिका उजागर होती जा रही है। जांच में पता चला है कि ठाकुरद्वारा के लेखपाल लियाकत के अलावा वर्ष 2012 में जिले में तैनात एक अन्य लेखपाल के खाते में भी घोटाले की रकम पहुंची। एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। अभी तक इस घोटाले में चार एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं।
ट्रेजरी घोटाले में अभी तक सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक अनिल मेहरोत्रा को ही मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा था। जांच में उजागर हो चुका है कि इस घोटाले में ट्रेजरी से लेकर कलक्ट्रेट तक कई कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका थी। ट्रेजरी के दो बाबू निलंबित हो चुके हैं। ठाकुरद्वारा के लेखपाल लियाकत अली और उसके बेटे के बैंक खातों में घोटाले की रकम पहुंचने की बात जांच में पहले ही सामने आ चुकी है। वर्ष 2012 में ट्रेजरी से निकली रकम में से भी एक बड़ा हिस्सा लियाकत के खाते में गया था। एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने बताया कि लेखपाल लियाकत के खाते में 2012 के घोटाले की रकम भी गई थी। इस मामले में भी उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्हाेंने बताया कि वर्ष 2012 में फर्जी बिलों के जरिए ट्रेजरी से जो रकम निकाली गई, उसमें से कुछ रकम एक अन्य लेखपाल के खाते में भी पहुंची है। लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं।