जिला अस्पताल की सीएमएस डा. शैली मेहरोत्रा सहित उनके परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में विवेचक एवं सीओ सिविल लाइन 13 मार्च को फिर से हाईकोर्ट में विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। बुधवार को हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और विवेक वर्मा ने दो पन्ने की रिपोर्ट को देखकर शासकीय अधिवक्ता और सीओ को फटकार लगाई। उन्होंने सीओ की ओर से पेश की गई दो पन्ने की रिपोर्ट को आधी अधूरी बताकर वापस कर दिया। चेतावनी देते हुए कहा है कि यह आखिरी मौका है, निर्धारित तारीख को सही तरीके से पूरी रिपोर्ट पेश नहीं की गई तो सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
हाईकोर्ट इलाहाबाद में बुधवार को डा. शैली चौहरा हत्या कांड पर करीब पंद्रह मिनट तक बहस हुई। इस दौरान सीओ सिविल लाइन ने दो पेज की रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि उनको कुछ महीने पहले ही इस मामले की जांच मिली है। उसी के बाद से अदालत की एडवाइजरी के आधार पर जांच पड़ताल की जा रही है। कॉल डिटेल के आधार पर जानकारी जुटाई गईं हैं, इस मामले की जांच को पूरा करने में अभी कुछ और वक्त लगेगा। कई और लोगों के फिर से बयान भी लिए गए हैं। अदालत ने इस तर्क को नकारते हुए कहा कि यह रिपोर्ट अधूरी है, नए सिरे से विस्तृत रिपोर्ट 13 मार्च को पेश की जाए।
जिगर कालोनी की कोठी नंबर 40 में डा. शैली मेहरोत्रा, पति डा. ओम मेहरोत्रा, ननद रश्मि मेहरोत्रा की गला रेतकर और पोती गिन्नी की गला घोंटकर 14 व 14 मई 2014 की रात को हत्या हो गई थी। इस मामले की रिपोर्ट अज्ञात हत्यारों के खिलाफ डा. शैली की बेटी गुंजन अरोरा ने दर्ज कराई थी। करीब चार साल तक इस मामले में पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। लखनऊ स्थित प्रयोगशाला से भेजी गई फिंगर प्रिंट की रिपोर्ट भी गायब कर दी गई। हाईकोर्ट के आदेश पर एक महीने से जांच में अब तेजी आई है।
लापरवाह जांच अधिकारियों पर अदालत सख्त
मुरादाबाद। न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और विवेक वर्मा की अदालत का साढ़े चार साल साल तक इस मामले की जांच में लापरवाह विवेचकों के खिलाफ सख्त रुख है । अदालत के समक्ष सीओ सिविल लाइन ने बताया कि वह तो कुछ महीनों से इस मुकदमे की जांच कर रहे हैं। साढ़े चार साल पहले इस मामले की जांच कई इंस्पेक्टरों को सौंपी गई थी। यह तथ्य अदालत के समक्ष बुधवार को आया है। इसी के बाद अदालत सख्त हुई और 13 मार्च को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।