दिल्ली से करीब पौने दो सौ किमी दूर मुरादाबाद में भी हवा साफ नहीं है। यहां की हवा में घुला स्मॉग और अन्य रसायन एनसीआर के समकक्ष पहुंचने को हैं। यानी कि हरियाणा-पंजाब से चला स्मॉग दिल्ली होकर अब मुरादाबाद पहुंचने लगा है। दिन में तेज धूप होने पर यह तेजी से आगे बढ़ता है और रात की सर्दी में जमीन से 50 -100 फीट तक जमा हो जाता है। ऐसे में लोगों को सांस लेना मुश्किल होता है।
धूल और रासायनिक गैस के कारण यह हवा लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाती है। फेफड़ों और सांस की नली में पहुंचकर कई तरह की गंभीर बीमारियों का कारण बनती है। एसपीएम 2.5 और गैस के कण फेफड़ों से भी नहीं रुकते हैं। ये सीधे खून में मिल जाते हैं और शरीर के विभिन्न हिस्सों में कैंसर का कारण बनते हैं। हरियाणा-पंजाब की ओर जलाया जा रहा पुआल जहरीला धुआं छोड़ता है। यह हवा अब मुरादाबाद की ओर पहुंचने लगा है। यही कारण है कि शहर में प्रदूषण का ग्राफ बढ़ रहा है।
शहर में एसपीएम 2.5 का स्तर (मानक 85)
मुरादाबाद 316
बागपत 318
नोएडा 321
गाजियाबाद 358
हापुड़ 315
दिल्ली 430
हवा में कोई दीवार नहीं लगी होती है। प्रदूषण एक स्थान पर बढ़ता है तो वह दूसरे क्षेत्रों तक फैलता जाता है। महानगर की हवा खतरनाक होने के बावजूद प्रदेश के कई शहरों से अच्छी है। लोगों की सेहत को ध्यान में रखकर और कई उपाय किए जा रहे हैं।
- बीके राजपूत, पर्यावरण वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।