फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुरादाबाद है नकली दवाओं का गढ़

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। मुरादाबाद नकली और नारकोटिक्स में प्रतिबंधित दवाओं का सबसे बड़ा गढ़ बन गया है। मुरादाबाद से ही पश्चिमी उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के लिए नकली और नारकोटिक्स में प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई हो रही हैं। बुधवार को 20 लाख रुपये से अधिक कीमत की पकड़ी गई दवाओं में सरकारी सप्लाई और कंपनियों के सैंपल मिलने से खलबली मची है। सैंपल में कई नामी कंपनियों की महंगी एंटीबायोटिक शामिल हैं। औषधि विभाग को नकली और नारकोटिक्स प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार से जुड़े गिरोह के अहम सुराग मिले हैं। विभाग गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में जुट गया है।
विज्ञापन

औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक के मुताबिक मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में जनवरी माह में ही नकली और प्रतिबंधित दवाओं के जखीरे बरामद हुआ। इसमें बब्बू उर्फ मो अली समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। मो अली के खिलाफ उत्तराखंड के काशीपुर में भी मुकदमा दर्ज है। उत्तराखंड के हरिद्वार, रुड़की और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पकड़ी जाने वाली नकली दवाओं में मुरादाबाद से सप्लाई की पुष्टि हो चुकी है। औषधि निरीक्षक के मुताबिक बुधवार को गिरफ्तार वीरेंद्र सिंह सैनी से पूछताछ में गिरोह से जुड़ी कई जानकारियां मिली हैं। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि मुरादाबाद नकली और प्रतिबंधित नारकोटिक्स दवाओं का सबसे बड़ा सेंटर है। अलीगढ़, आगरा, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली समेत कई जगहों से नकली और प्रतिबंधित नारकोटिक्स दवाएं मुरादाबाद आती हैं। मुरादाबाद से अन्य जिलों को सप्लाई की जाती हैं। ठाकुरद्वारा से गिरोह संचालित होता है।
गिरोह में सैकड़ों लोग जुड़े हैं और इनका मजबूत नेटवर्क है। अधिक मात्रा में दवाओं की सप्लाई रोडवेज बसों से होती है। यात्री बसों में अमूूमन चेकिंग नहीं होती है। गिरोह इसका फायदा उठाता है। बस चालक और परिचारक को एक जगह से दूसरी जगह दवाओं का जखीरा पहुंचाने के एवज में पांच से छह हजार रुपये मिलते हैं। बसों से आटो में लोडिंग और अनलोडिंग करने वालों का कमीशन तय है। मेडिकल स्टोर और देहात क्षेत्र के क्लीनिकों में सप्लाई करने वालों को भी एक हजार रुपये रोजाना दिया जाता है। क्लीनिक और देहात क्षेत्र की परचून की दुकानों तक इन दवाओं की सप्लाई होती है। सप्लाई करने वाले अधिकतर युवा हैं। वीरेंद्र से पूछताछ में ही आगरा से दवाओं की सप्लाई करने वालों की जानकारी मिली है। विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
विज्ञापन


मल्टीनेशनल कंपनियों की महंगी दवाएं
औषधि निरीक्षक के मुताबिक बरामद दवाएं कई नामी कंपनियों की एंटीबायोटिक हैं। लेटेस्ट एंटीबायोटिक हैं। जिनकी कीमत सात सौ रुपये से एक हजार रुपये प्रति पत्ता है। इनमें कई दवाओं को कंपनियों ने अभी बाजार में उतारा है। बरामद दवाएं सैंपल पीस हैं।

कई गुना कीमत पर बिकती हैं नशे की दवाएं
नारकोटिक्स में प्रतिबंधित दवाएं नशे के लिए इस्तेमाल होती हैं। प्रिंट रेट से कई गुना महंगी तक बेची जाती हैं। गिरोह को सबसे अधिक मुनाफा इन्हीं दवाओं की सप्लाई में होता है। बरामद कई दवाएं बेहद खतरनाक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें