यूपी पुलिस के सामने आगामी वर्ष में लोकसभा चुनाव, कुंभ मेला और एक लाख पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की चुनौती है। इस वजह से अगले साल को डीजीपी ओपी सिंह ने ईयर ऑफ ट्रेनिंग घोषित किया है और इसे चुनौती के रूप में स्वीकार कर तैयारी शुरू करने की बात मंगलवार को पुलिस लाइन में कही। वह यहां पर मंडलीय अपराध की समीक्षा और अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे 16 आईपीएस को संबोधित करने आए थे।
डीजीपी ने बताया कि प्रदेश में गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अपराध के आंकड़ों में गिरावट आई है। संगठित गिरोह अब वारदात नहीं कर रहे हैं। फिरौती की वारदातों पर काबू पाया गया है। थानों में लोगों से पुलिस के व्यवहार में सुधार आया है लेकिन अभी इससे संतुष्ट नहीं हैं। इसमें सुधार की अभी जरूरत है। विवेक तिवारी हत्याकांड की घटना से वह इस बारे में सोचने को मजबूर हुए और लखनऊ सहित प्रदेश के सभी जिलों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार में सुधार के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया गया। प्रदेश में महिला पुलिस की तीन बटालियन बनाई जाएगी। इनमें एक लखनऊ दूसरी मुजफ्फरनगर में स्थापित की जाएगी। अगले साल करीब 1.29 लाख सिपाहियों की भर्ती कर उनका प्रशिक्षण कराना है। इसके लिए जालौन और सुल्तानपुर में दो प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। जिनका उद्घाटन डेढ़ माह के अंदर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। नौ प्रशिक्षण संस्थानाें की क्षमता छह हजार से बढ़ाकर 12 हजार की जाएगी। प्रदेश में 39 नए थाने बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इनमें मुरादाबाद के सात थाने हैं। पेशेवर दो हजार बदमाशों को गिरफ्तार किया गया। 197 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई है। सभी थानाक्षेत्र के मुख्य दस बदमाशों की सूची तैयार की गई है। तीन लाख बदमाशों का आनलाइन डोजियर तैयार किया गया है। प्रदेश में साइबर अपराध के साढे़ तीन लाख केस लंबित हैं। यूपी 100 की बिल्डिंग में स्टेट आफ द आर्ट साइबर क्राइम लैबोरेट्री बनाई जाएगी। जिससे जांच में तेजी आए।