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दमदार पैरवी से एक साल में सलाखों में पहुंचे बारह दरिंदे

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मुरादाबाद। अलीगढ़ का चर्चित मासूम हत्याकांड हो या फिर हमीरपुर का गैंगरेप- मर्डर केस। ऐसी सनसनीखेज वारदातों से जनता में आक्रोश है। लोग धरना प्रदर्शन करने के साथ ही पुलिस और सरकार का विरोध कर रहे हैं। दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग तेजी से उठ रही है। अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए मजबूत पैरवी जरूरी है।
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मुरादाबाद में पाक्सो एक्ट के केसों की पैरवी के लिए विशेष पैरवी सेल का गठन किया गया तो यहां नतीजे ही बदल गए। एक साल के भीतर ही मासूमों से दुष्कर्म, हत्या और छेड़खानी जैसी घिनौनी घटनाएं करने वाले बारह दोषी सलाखों में पहुंच गए। इनमें दो दोषियों को उम्रकैद, आठ को दस-दस साल की सजा और एक दरिंदे को तेरह साल, जबकि एक दोषी को चार साल की कैद हुई है। इन केसों की मॉनिटरिंग खुद एसएसपी ने की है। विवेचक से एक-एक बिंदू पर चर्चा की। साक्ष्य जुटाने, विवेचना करने, गवाह, पीड़िता और परिवार के बयान कराए। इसके अलावा चार्जशीट दाखिल कराने के बाद ही हर तारीख पर खुद पुलिस कर्मी पीड़िताओं को अदालत तक लेकर पहुंचे। उनके बयान दर्ज कराने के बाद सुरक्षित उनके घर तक छोड़ा गया।

पुलिस की पहल से पीड़िताओं को मिल रहा न्याय
तत्कालीन एसएसपी जे रविंदर गौड ने 30 मई 2018 को विशेष पैरवी सेल का गठन किया था। जिसमें कानून के अच्छे जानकार दरोगा व इंस्पेक्टर को तैनात किया गया। इसके बाद जनपद के सभी थानों से पाक्सो एक्ट से जुड़े केसों की जानकारी ली गई। नारी उत्थान केंद्र में टीम के लिए दफ्तर बनाया गया। पैरवी सेल के प्रभारी नीरज तोमर ने बताया कि यहां केस से जुड़े वादी, उसके परिवार के लोगों की काउंसलिंग की जाती है। उन्हें सुरक्षा, इलाज, उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की जाती है।
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इन बारह दोषियों को हो चुकी है सजा
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दोषी का नाम सजा
वाजिद आजीवन कारावास, 90 हजार का अर्थदंड
जितेंद्र शर्मा सश्रम आजीवन, 20 हजार रुपये का अर्थदंड
पिंटू 13 साल
प्रमोद कुमार दस साल की सजा
इबले हसन दस साल
रोबिन सिंह दस साल
सुमित दिवाकर दस साल
टिंकू दस साल
अनिल उर्फ अन्नु दस साल
छत्तर दस साल
मनोज दस साल
हरिओम चार साल
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