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मुरादाबाद में धड़ल्ले से हो रही जाली करेंसी की छपाई

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मुरादाबाद। मुरादाबाद मंडल में जाली नोटों के सप्लायरों ने मुरादाबाद को अपना गढ़ बना लिया है। यहां पर ही जाली नोटों की छपाई की जाती है, एक दो नहीं कई कालोनियों में जाली नोट की छपाई का खुलासा हो चुका है और ये नकली नोट मुरादाबाद मंडल के अलावा आसपास के राज्यों में भी खपाए जा रहे हैं। यहां 50 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक की जाली करेंसी तैयार की जा रही है।
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13 मई को भी गलशहीद के असालतपुरा में जाली नोटों की छपाई के आरोप में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था, आरोपियों के कब्जे से 1.32 लाख रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे। ये गिरोह सौ और पचास रुपये के भी नकली नोट छापता था। पकड़े गए आरोपी शाने आलम उर्फ गुड्डू सैफी निवासी कांठ और जफर निवासी भदौड़ा है। जफर का छोटा भाई शमीम भी इसी गिरोह का सदस्य था, जिसे पुलिस ने बाद में गिरफ्तार कर लिया लेकिन चौथा आरोपी छोटू अभी भी वांछित है। पुलिस छोटू को गिरफ्तार भी नहीं कर सकी थी कि अब डबल फाटक निवासी मदर अली का नया गिरोह सामने आ गया है। इसकी तलाश में पुलिस की दो टीमें लग गई हैं। पुलिस के मुताबिक, मदर अली ने ही पाकबड़ा पुलिस द्वारा पकडे़ गए आरोपियों को जाली करेंसी मुहैया करवाई थी।


मदर अली छापता है असली
जैसे दो हजार के जाली नोट
मुरादाबाद। अब तक जो जाली करेंसी पकड़ी जा रही थी, वह असली नोटों की फोटो स्टेट और स्कै न कॉपी होती थी, जिस वजह से उनकी पहचान कर पाना आसान होता था लेकिन पाकबड़ा पुलिस ने दो-दो हजार रुपये की जो 5.92 लाख की जाली करेंसी पकड़ी है, उसको आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है।
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एसओ पाकबड़ा नीरज शर्मा ने बताया कि अब तक पकडे़ गए जाली नोटों में ये जाली नोट इसलिए अलग हैं क्योंकि इनका कागज लगभग असली नोटों के कागज जैसा होता है। इसमें अलग से ही सिक्योरिटी थ्रेट भी लगाया जाता है, ये सिक्योरिटी थ्रेट इनको कैसे मिलता था इस संबंध में जांच की जाएगी। अंदेशा है कि सिक्योरिटी थ्रेट भी डुप्लीकेट है। मदर अली के गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं, ये अभी पता नहीं चल सका है। मदर अली के मोबाइल नंबर के जरिए उससे जुडे़ लोगों का पता लगाया जा रहा है।

एक करोड़ से अधिक जाली करेंसी खपाए जाने का अंदेशा
मुरादाबाद। पुलिस को अंदेशा है कि मदर अली और उसके गिरोह के सदस्य एक करोड़ से अधिक जाली करेंसी को मुरादाबाद मंडल, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा तक में खपा चुके हैं, पांच प्रतिशत से लेकर तीस प्रतिशत तक पर ये जाली करेंसी खपाई जाती है। अपराध जगत से जुडे़ कई अन्य लोग भी इस गिरोह के सदस्य हो सकते हैं। जो की कमीशन पर जाली करेंसी को खपाने का काम करते हैं।
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