केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि वह ईडस्ट को सड़क या फिर अन्य निर्माण में मिट्टी भराव के स्थान पर इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन इसको जारी की गई एडवाइजरी के अनुसार ही मिट्टी के स्थान पर भराई में इस्तेमाल किया जा सकेगा। फिलहाल इस ईडस्ट को रामगंगा किनारे से फरवरी माह तक हटाकर ऐसे स्थान पर रखा जाए, जिससे कि यहां की मिट्टी पर विपरीत असर न पड़े।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केइस आदेश से प्रदेश सरकार को राहत मिली है। क्योंकि मिट्टी के खनन में कमी आएगी और अनुपयोगी इस ईडस्ट को इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि बोर्ड की ओर से अभी तक एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, इसे तैयार करने में पर्यावरण वैज्ञानिक लगे हुए हैं। वैज्ञानिकों की ओर से एडवाइजरी तैयार होने के बाद ही सरकार उसे ईडस्ट के आसपास के जिलों में सड़क तथा अन्य निर्माण के दौरान मिट्टी के स्थान पर भराव में इस्तेमाल कर सकेगी।
एनजीटी के आदेश पर फिलहाल राम गंगा किनारे पड़ी ईडस्ट को हटाकर नगर निगम की ओर से एक अन्य स्थान पर पॉलिथीन बिछाकर डाला जा रहा है। जिससे कि आसपास की जमीन खराब न हो। अभी तक 10 फीसदी ही ईडस्ट शिफ्ट हो सकी है, जबकि राम गंगा किनारे को ईडस्ट से मुक्त कराने के लिए फरवरी 2019 तक का समय दिया गया है। यह जिम्मेदारी नगर निगम, विकास प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी गई है। इसी दौरान इस ईडस्ट को ट्रीटमेंट के साथ डंप कराने के लिए अमरोहा केहसनपुर में प्लांट लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया है। लाइसेंस का आवेदन बोर्ड में लंबित पड़ा हुआ है। इसके लिए बोर्ड ने लाइसेंस देने से पहले विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय टीम बना दी है। टीम प्लांट के सत्यापन के बाद ही लाइसेंस जारी करने की स्वीकृति देगी। उसी के बाद प्रस्तावित स्थान से ई डस्ट को स्थाई डंपिंग ग्राउंड तक ले जाने के लिए सरकार और डंपिंग ग्राउंड बनाने वाली कंपनी के बीच शर्तों को लेकर सहमति बन सकेगी।
चेंबर बनाकर डाली जाएगी ईडस्ट
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आदेश किया है कि चेंबर बनाकर ही ईडस्ट डाली जाए। इसके लिए चेंबर आरसीसी का बनेगा, उसी केबाद इस ईडस्ट को सड़क तथा अन्य निर्माण वाले स्थानों पर मिट्टी के स्थान पर भराई में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सड़क या अन्य निर्माण में मिट्टी के स्थान पर ईडस्ट को इस्तेमाल करने की सहमति दे दी है। फिलहाल इस ईडस्ट को डंप करने के लिए एनओसी भी जारी हो गई है। लाइसेंस की प्रक्रिया बोर्ड में विचाराधीन है।
आरके सिंह, मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड