मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष सीएल शेखर और पूर्व उप सचिव प्रदीप कुमार सिंह अर्बन सीलिंग भूमि घोटाले में फंस गए हैं। एमडीए उपाध्यक्ष कनक त्रिपाठी ने दोनों अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए शासन से अनुमति मांगी है। दोनों अधिकारियों ने प्राधिकरण को रख रखाव के लिए मिली अर्बन सीलिंग की करोड़ों रुपये की भूमि को वर्ष 2008 में अधिकार नहीं होने के बावजूद अवैध रूप से एक्सचेंज कर लिया। हाईवे किनारे की भूमि का हाईटेंशन लाइन के नीचे की महत्वहीन भूमि से विनिमय कर सरकार को करोड़ों रुपये की नुकसान पहुंचाया।
30 मार्च 1993 और 14 मार्च 2002 को लाकड़ी फाजलपुर में 19 गाटाओं की अर्बन सीलिंग से प्राप्त राज्य सरकार की 1.385 हेक्टेयर भूमि का कब्जा मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को रख रखाव के लिए दिया गया था। एमडीए के पास इस भूमि का मालिकाना हक नहीं था उसे सिर्फ भूमि की देखभाल करनी थी। इन गाटाओं में कुछ भूमि मुरादाबाद - दिल्ली हाईवे के नजदीक स्थित है, जिसकी बाजार में कीमत बेहद ज्यादा है। एमडीए उपाध्यक्ष कनक त्रिपाठी ने शासन को पत्र भेजकर कहा है कि वर्ष 2008 में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के तत्कालीन उप सचिव प्रदीप कुमार और उपाध्यक्ष सीएल शेखर ने अर्बन सीलिंग की 1.385 हेक्टेयर भूमि को बिना किसी सक्षम स्तर से अनुमति हासिल किए अनियमित रूप से अन्य भू स्वामियों की अनउपयुक्त भूमि से एक्सचेंज कर लिया। प्रदीप कुमार इस समय उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण में तैनात हैं जबकि सीएल शेखर सेवानिवृत्त हुए हैं। भूमि राज्य सरकार की थी लेकिन विनिमय से पहले न तो शासन से अनुमति ली गई और न ही सक्षम स्तर से। सीलिंग की कीमती भूमि के बदले यूपीपीसीएल की हाई टेंशन लाइन के नीचे की अनउपयुक्त भूमि ले ली गई। एमडीए अधिकारियों ने शासन को बताया है कि बदले में ली गई इस भूमि का उपयोग किया जाना संभव नहीं है। क्योंकि हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट कराने की कीमत भूमि की कीमत से भी अधिक है। वीसी के सख्त तेवरों से प्राधिकरण के पूर्व अफसरों में खलबली मची है।
एक महीना बाद भी अनुमति नहीं मिली
मुरादाबाद।
अर्बन सीलिंग भूमि घोटाले में फंसे पूर्व डीएम जुहैर बिन सगीर की ही तरह एमडीए के दोनों पूर्व अफसरों के खिलाफ कार्रवाई में भी शासन का ढुलमुल रवैय्या उजागर हो रहा है। दोनों अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए एमडीए अधिकारियाें ने शासन से एक माह पूर्व अनुमति मांगी थी। लेकिन करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि को ठिकाने लगाने के आरोपी दोनों अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति शासन ने अभी तक नहीं दी है।
एमडीए को नहीं है एक्सचेंज का अधिकार
मुरादाबाद।
नियमों की बात करें तो प्राधिकरण अफसरों को भूमि एक्सचेंज करने का अधिकार ही नहीं है। अर्बन सीलिंग की भूमि एमडीए को सिर्फ रख रखाव के लिए दी गई है। भूमि राज्य सरकार की है और जिले में इसका मालिकाना हक डीएम के पास होता है। एमडीए के पास मालिकाना हक नहीं है इसलिए एमडीए न तो इसे बेच सकता है और न ही इसका विनिमय कर सकता है। इस्तेमाल करने की एवज में एमडीए को इसकी कीमत चुकानी होती है। भूमि के विनिमय का अधिकार सिर्फ कलक्टर की कोर्ट या फिर कलक्टर द्वारा नामित किए गए एसडीएम कोर्ट को ही होती है। विनिमय से पहले यह भी देखना होता है कि जिस भूमि से सरकारी भूमि का विनिमय हो रहा है उसकी मालियत क्या है। मालियत की जांच तहसील करती है और दोनों भूमि की मालियत समान होने पर ही भूमि का विनिमय हो सकता है। जिस भूमि से सरकारी भूमि का विनियम हो रहा है उसकी मालियत सरकारी भूमि की मालियत के बराबर होनी चाहिए।
दोनों अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करके लाकड़ी फाजलपुर में अर्बन सीलिंग से प्राप्त भूमि को गलत तरीके से समायोजित करके सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचाई। अर्बन सीलिंग की भूमि प्राधिकरण को सिर्फ रख रखाव के लिए मिलती है। उसके विनिमय का अधिकार प्राधिकरण को है ही नहीं। दोनों अधिकारियों ने बगैर सक्षम स्तर से अनुमति लिए अवैध रूप से हाईवे किनारे की अर्बन सीलिंग भूमि को निजी लोगों की हाईटेंशन लाइन के नीचे की महत्वहीन भूमि से बदल लिया। शासन से दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुमति मांगी गई है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। - कनक त्रिपाठी, उपाध्यक्ष, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण।