10 करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रेजरी घोटाले में पहली बार सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए डीएम ने सोमवार को भूलेख लिपिक प्रदीप कुमार और बिल बाबू उज्जवल शर्मा को निलंबित कर दिया है। घोटाले में कई बड़े अधिकारियों पर भी उंगलियां उठ रही हैं। सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक समेत कई अन्य आरोपी इस मामले में जेल जा चुके हैं। घोटाले में फंसे एक लेखपाल, उसके बेटे व अन्य सरकारी कर्मचारियों को अफसर बचाने में जुटे हैं।
करीब तीन माह पहले ट्रेजरी से फर्जी बिलों के जरिए रकम निकाले जाने का खुलासा हुआ था। एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने पूरा मामला पकड़ा था। जांच में खुलासा हुआ था कि सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक अनिल मेहरोत्रा पिछले कई सालों से सरकारी ओहदेदारों की मदद से ट्रेजरी का खजाना ‘लूट’ रहा था। लेखपालों के एरियर के फर्जी बिल बनाकर वह सरकारी ओहदेदारों की मदद से उन्हें ट्रेजरी से पास करा लेता था। अभी तक छह वर्षों की जांच में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला उजागर हो चुका है। एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने बताया कि ट्रेजरी घोटाले में डीएम ने सोमवार को भूलेख लिपिक प्रदीप कुमार और बिल बाबू उज्जवल शर्मा को निलंबित कर दिया गया है। बिलों को अपलोड करने का काम उज्जवल ही करता था। प्रदीप के कुर्सी पर होने के बावजूद सभी विभागीय कार्य सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक अनिल मेहरोत्रा करता था। एडीएम ने बताया कि मामले में जो भी अन्य कर्मचारी दोषी हैं उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
ट्रेजरी घोटाले में ही ठाकुरद्वारा के लेखपाल और उसके बेटे का नाम भी पुलिस विवेचना में आया था। दोनों के खातों में ट्रेजरी घोटाले की रकम गई थी। इसके बावजूद अभी तक लेखपाल के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। डीएम राकेश सिंह का कहना है कि पुलिस जांच में एलआरसी और बिल बाबू की लापरवाही की बात कही गई है। इसलिए दोनों को निलंबित किया गया है। आपराधिक कृत्य के साक्ष्य नहीं मिले हैं।