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साढ़े छह हजार की धोखाधड़ी में 37 साल बाद सजा

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मुरादाबाद।
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सहकारी समिति से सेना के सेवा निवृत्त अफसर साधु सिंह की बारह एकड़ जमीन पर फर्जी तरीके से 6385 रुपये कर्ज लेने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आजाद सिंह की अदालत ने 37 साल दस माह बाद फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में समिति के तत्कालीन सचिव रामप्रसाद को दोषी मानते हुए दो साल की कैद और ढाई हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जबकि समिति के तत्कालीन सभापति समेत दो मुलजिमों की मृत्यु हो चुकी है।
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अभियोजन अधिकारी सहला शमी ने बताया कि 20 जनवरी 1981 को पंजाब के पटियाला निवासी साधु सिंह ने डिलारी थाने में सहकारी समिति के सचिव रामप्रसाद, सभापति नन्हें खां व दो अन्य हरस्वरूप व चंदन सिंह के खिलाफ 416, 420 और 468 आईपीसी की धाराओं में केस दर्ज कराया था। जिसमें साधु सिंह ने बताया कि वह सेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में पटियाला पब्लिक हेल्थ विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने फरीदपुर में बारह एकड़ जमीन खरीदी थी। जिसकी जुताई बुवाई उनका साला अर्जुन सिंह करता है। सहकारी समिति से चंदन सिंह ने अपना फोटो लगाकर मेरे फर्जी हस्ताक्षर समिति से 6385 रुपये का कर्ज लिया। जिसकी गवाही हरस्वरूप ने दी। पुलिस ने इस केस की तफ्तीश करने के बाद चारों मुलजिमों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। जिसकी सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट(अपराध शाखा) की अदालत में चली। सरकार की ओर से अभियोजन अधिकारी सहला शमी और राजेश कुमार ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अभियुक्त नन्हें खां और हरस्वरूप की मृत्यु हो चुकी है, जबकि चंदन सिंह की पत्रावली पृथक होने के कारण विचारण लंबित है। अदालत ने इस मामले में तत्कालीन सचिव रामप्रसाद को दोषी मानते हुए दो साल की सजा और ढाई रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है।
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