मुरादाबाद। गलशहीद के 33 साल पुराने दिलशाद हत्याकांड में अदालत ने शनिवार को मुलजिम आलम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि एक मुलजिम केस की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
गलशहीद थानाक्षेत्र के असालतपुरा निवासी इरशाद ने 16 मई 1985 को गलशहीद थाने में अकरम और उसके भाई आलम के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें इरशाद ने बताया था कि अकरम ने उसके भाई दिलशाद ने रुपये उधार लिए थे। दिलशाद जब भी अपने रुपये वापस मांगता था, तो अकरम नाराज होकर उससे झगड़ा करने लगा था। 16 मई1985 को भी दिलशाद अपने रुपये मांगने गया। तब अकरम व उसके भाई आलम ने झगड़ा करते हुए उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिए थे। जिससे दिलशाद की मौत हो गई थी। इस केस की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राम अचल यादव की अदालत में चली। जिसके विचारण के दौरान सह आरोपी अकरम की मौत हो गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ब्रजराज सिंह ने सरकार की ओर से पक्ष रखा और मुलजिम को सजा दिलाने की दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पुख्ता सबूतों के आधार पर मुलजिम आलम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।