मझोला के सूर्य नगर में पूर्व पार्षद यज्ञदत्त शर्मा उर्फ निगम ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनकी हत्या की गई थी। ये आरोप मुख्यमंत्री और डीजीपी को भेजे गए एक गुमनाम पत्र में लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। सीओ सिविल लाइंस को जांच सौंपी गई है।
मझोला थानाक्षेत्र के सूर्य नगर में पूर्व पार्षद यज्ञ दत्त शर्मा उर्फ निगम का परिवार रहता है। 25 जुलाई को कनपटी पर तमंचा सटाकर पूर्व पार्षद ने सुसाइड कर लिया था। आंगन में कुर्सी पर बैठकर उन्होंने आत्महत्या का कदम उठाया था। उस वक्त घर में पत्नी दुर्गेश शर्मा और पुत्रवधु शालिनी मौजूद थीं। यज्ञदत्त शर्मा अपने पोते को स्कूल छोड़कर घर लौटे और उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। उनकी आत्महत्या के छह माह बाद एक गुमनाम पत्र ने सनसनी फैला दी है। मुख्यमंत्री, डीजीपी कार्यालय को भेजे गए पत्र में कहा गया कि पूर्व पार्षद यज्ञदत्त शर्मा ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनकी हत्या की गई थी। पत्र में कुछ लोगों पर हत्या करने का आरोप लगाने के साथ ही मझोला पुलिस की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाए गए हैं। पत्र में एक डाक्टर और नर्स का जिक्र किया गया है। इतना नहीं पुलिस ने भी सुसाइड नोट जांच नहीं कराई गई। मुख्यमंत्री कार्यालय से पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए हैं। गुमनाम पत्र में राम रहीम प्रकरण का भी जिक्र किया गया है। जिसमें कहा कि उस राम रहीम प्रकरण की जांच भी एक गुमनाम पत्र की शिकायत पर हुई थी। उसी तरह इस प्रकरण की भी सीबीआई जांच हो। सीओ सिविल लाइंस राजेश कुमार ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे। उसी आधार कार्रवाई करेंगे।