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प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पीएम आवास योजना में धांधली, कूड़े के ढेर में मिले फार्म

Thu, 29 Nov 2018 02:11 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
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PM awas yojana
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घूसखोरों और घोटालेबाजों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पीएम आवास योजना को भी नहीं बख्शा। पिछले दिनों प्रधानमंत्री आवास योजना के फार्म कूड़े के ढेर में पड़े मिले थे। पीएम आवास योजना के नाम पर रकम की डिमांड की दर्जनों शिकायतें हो चुकी हैं। लेकिन कार्रवाई डूडा के लिए सर्वे करने वाली कंपनी के जेई को हटाने तक ही सिमट गई। घूसखोरी की ज्यादातर शिकायतों पर अफसरों का रवैय्या टालमटोल वाला ही रहता है। यही वजह है कि अधिकारी खुलेआम रिश्वत लेने में भी नहीं झिझक रहे हैं।

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अभी ज्यादा दिन नहीं बीते जब प्रधानमंत्री आवास योजना के करीब दो बोरा फार्म आवेदन कटघर के पीतल बस्ती में कूड़े में पडे़ मिले थे। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करने में ही अधिकारियों ने तीन दिन लगा दिए। कार्रवाई आगे आज तक नहीं बढ़ी।

प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदन कूड़े में कैसे पहुंचे और कौन इसके लिए जिम्मेदार है, जैसे सवाल आज तक अनुत्तरित हैं। इससे पहले डूडा पर भी प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। डूडा के लिए काम करने वाली कंपनी के जेई को हटा दिया गया था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिलाने के नाम पर रकम वसूली की शिकायतें आए दिन कलक्ट्रेट तक पहुंच रही हैं। लोगों ने कई बार इसे लेकर प्रदर्शन भी किए हैं। बुधवार को आवास विकास के संपत्ति अधिकारी की गिरफ्तारी ने इन आरोपों को बल दे दिया है। जिस तरह संपत्ति अधिकारी प्रधानमंत्री आवास योजना का आवंटन करने के नाम पर घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया है उसने इस योजना में गड़बड़ियों पर मुहर लगा दी है। डूडा, आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरण प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास बना रहे हैं।
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हरगिज न दें रिश्वत, आवाज उठाएं: निर्देश
संपत्ति अधिकारी को घूस लेते रंगे हाथ पकड़वाने वाली निर्देश चौधरी का कहना है कि वह 20 हजार रुपये देकर आसानी से आवंटन करा सकती थीं, लेकिन उनकी अंतरात्मा को यह स्वीकार नहीं था। मिथलेश कहती हैं कि कई दिन के अंतर्द्धंद के बाद उन्होंने तय किया वह एंटी करप्शन के पास जाएंगी। सोमवार को वह एंटी करप्शन ब्यूरो के आफिस में गईं और रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की। टीम ने पूरा सहयोग किया और जाल बिछाकर संपत्ति अधिकारी को धर दबोचा। मझोला थाने में मौजूद निर्देश चौधरी कहती हैं कि किसी को भी रिश्वत नहीं देना चाहिए। सरकार रियायत पर योजनाएं पब्लिक के लिए शुरू करती है और उसका फायदा सरकारी अधिकारी उठाते हैं। निर्देश कहती हैं कि रिश्वत मांगने वालों को जब इस तरह रंगे हाथ पकड़वाया जाएगा तभी रिश्वतखोरी को रोका जा सकता है। सरकार की योजनाएं पब्लिक के लिए हैं तो पब्लिक रिश्वत क्यों दे।

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जिले में पहले भी हुई हैं कई गिरफ्तारी

जिले में पहले भी घूस लेते कई अधिकारी रंगे हाथ पकड़े गए हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में कार्रवाई अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाती। नगर निगम के एक जेई को करीब तीन साल पहले घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। पकड़ा गया जेई आज भी निगम में काम कर रहा है। ठाकुरद्वारा में करीब चार साल पहले एक तहसीलदार को एंटी करप्शन ब्यूरो ने रिश्वत लेते पकड़ा था लेकिन इस कार्रवाई को भी एंटी करप्शन ब्यूरो अंजाम तक नहीं पहुंचा सका। आवास विकास का ही एक अन्य अधिकारी करीब चार साल पहले घूस लेते पकड़ा गया था। एंटी करप्शन की तुलना में सीबीआई की एंटी करप्शन विंग द्वारा पकड़े गए अधिकारियों के खिलाफ ज्यादा कड़ी कार्रवाई हुई है। सीबीआई द्वारा घूस लेते पकड़ा गया रेलवे का एक इंजीनियर पिछले सात साल से जेल में हैं। जबकि एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा पकड़े गए अधिकारी जमानत पर छूटे और फिर समय के साथ उनके केस भी छूटते चले गए।

एमडीए का जेई भी भ्रष्टाचार में फंसा
एमडीए के जेई विक्रम सिंह के खिलाफ मंगलवार को ही गाजियाबाद में सतर्कता अधिष्ठान ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई है। एमडीए के कई अभियंता भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे हैं। एमडीए अभियंताओं पर अवैध निर्माणों को लेकर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं। यही वजह है कि वीसी कनक त्रिपाठी की सख्ती के बाद भी शहर में अवैध निर्माण रुक नहीं पा रहे हैं।
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