सोमवार रात डकैतों के कहर का सामना कर चुके पैपटपुरा के तीनों परिवार गुरुवार को अपने घर छोड़ गए। तीनों के घर बस्ती से थोड़ा हटकर थे। सुरक्षा के लिहाज इनमें से किसी ने अपने रिश्तेदार के घर पनाह ली तो किसी ने शहर के भीतर किराए का ठिकाना ढूंढ लिया है।
घर छोड़ने को मजबूर हुए इन परिवारों का कहना है कि एक तरफ डकैतों की दहशत थी तो दूसरी ओर पुलिस की धमकियां। पुलिस घटना को झुठलाने के लिए बदमाशों की संख्या कम करने का दबाव बना रही थी।
सोमवार रात खुद को पुलिस बताकर पैपटपुरा नई बस्ती के तीन घरों में घुसे सात हथियारबंद बदमाशों ने लूटपाट के साथ ही महिलाओं और बच्चाें को सरियाें से पीटा था। डकैतों ने महिलाओं से बदसलूकी की थी, जिसका खौफ चार दिन बाद भी इन परिवारों के चेहराें पर तैर रहा है।
गुरुवार को परिवार के साथ घर छोड़कर जा रहे दहशतजदा बबलू ने बताया कि सोमवार रात मनोज के घर डाका डालने के बाद डकैत करीब तीन बजे उनके घर में दीवार फांदकर घुसे थे। डकैतों ने आते ही सरियों से पीटना शुरू कर दिया। शोर मचाने पर इज्जत भी गंवा देने की धमकी दी और नगदी, जेवर लूट ले गए।
बबलू का कहना है कि खून पसीने की कमाई से बनाया आशियाना कोई ऐसे ही छोड़कर नहीं जाता। डकैतों का खौफ रात में सोने नहीं देता। पुलिस से सुरक्षा की उम्मीद थी लेकिन पुलिस उल्टा धमकाने में लगी है। घटना के बाद पुलिस आई थी। सुबह थाने गए तो डांट डपटकर चोरी की तहरीर लिखवा ली। बबलू ने बताया कि पुलिस दबाव बना रही है कि वह बदमाशों की संख्या सात नहीं बताएं।
बोले, जब पुलिस ही मदद करने को तैयार नहीं तो यहां किसके भरोसे रहें। डकैत पहले ही धमका गए थे कि पुलिस में शिकायत की तो फिर आएंगे और महिलाआें से बदतमीजी करेंगे। बबलू के मकान के सामने रहने वाले मनोज तो बुधवार को ही घर में ताला लगाकर अपने परिवार को एक रिश्तेदार के घर ले गए। मनोज ने बताया कि घटना को याद कर बच्चे कांपने लगते हैं। जबकि शांति देवी का परिवार भी मकान खाली कर दूसरी जगह चला गया है।