ईद से पहले जीशान की मौत से परिवार में मातम छा गया है। परिवार वालों का रोकर बुरा हाल है। अब उनकी जुबां पर पहला सवाल यह है कि आखिर जीशान का सिर कहां है? एक बच्चे को इतनी निर्ममता से मौत के घाट उतारने वाले आरोपी कहां के हैं? किस रंजिश में उन्होंने वारदात को अंजाम दिया है? पुलिस को मामले की जानकारी थी, फिर भी वह जीशान को ढूंढने में लापरवाही क्यों बरत रही थी?
इन सब सवालों पर पुलिस का एक ही जवाब है कि आरोपियों के बारे में पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ कर जीशान के सिर का पता लगाया जाएगा। जीशान के सिर को बरामद करने का आश्वासन तो अधिकारी दे रहे हैं लेकिन समय कितना लगेगा? इस सवाल का जवाब उनके पास भी नहीं है। जीशान के मामा यामीन की मांग है कि हत्यारों की गिरफ्तारी से पहले पुलिस जीशान का कटा सिर ढूंढकर लाए। इस मामले में देरी होने पर वह लोग प्रदर्शन को मजबूर होंगे, इसकी चेतावनी भी दी है।
जीशान हत्याकांड में करीबी पर भी पुलिस की नजर
मुरादाबाद। जीशान हत्याकांड में संगीन बदमाशों के अलावा पुलिस की नजर करीबियों पर भी है। जिस तरह से सट्टे का नंबर फोन कर जीशान के मामा से पूछा गया था और नंबर न बताने पर जीशान की हत्या की धमकी दी गई थी, यह बात पुलिस के गले नहीं उतर रही है। महज सट्टे का नंबर न बताने से जीशान की हत्या करने के अलावा कई बिंदु पर पुलिस की टीमें जांच कर रही हैं, इनमें तंत्र क्रिया, आपसी रंजिश भी शामिल है।
छह दिन बीते, आरोपी का नंबर बंद होते ही ठहरे पुलिस के कदम
मुरादाबाद। मूंढापांडे से अपहरण कर सट्टे की रकम के चक्कर में की गई अमरोहा के जीशान की हत्या के मामले में पुलिस अब तक कटा हुआ सिर बरामद नहीं कर सकी है। वारदात को छह दिन का समय बीत चुका है, इसके बावजूद आरोपियों के गिरेबां तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों ने बताया कि आरोपी का मोबाइल लगातार बंद आ रहा है। जिस वजह से पुलिस की जांच इस मामले में आगे नहीं बढ़ पा रही है।
चार टीमों को जीशान के हत्यारों की तलाश में लगाया: आईजी
मुरादाबाद। आईजी बीके सिंह ने बताया कि जीशान हत्याकांड के खुलासे के लिए चार टीमों को लगाया गया है। मूंढापांडे पुलिस की दो टीमें है, तीसरी इंटेलीजेंस विंग की टीम और चौथी टीम साइबर सेल के इंस्पेक्टर की अगुवाई में बनी है। चारों टीमें कई एंगल पर जांच कर रही है, उम्मीद है कि जल्द ही खुलासा होगा। यह मामला मैंने प्राथमिकता पर लिया है।
साइड स्टोरी दो
चक्कर की मिलक में दफन है जीशान के कत्ल का राज
- कालोनी में रहते हैं नामी आरोपी, सट्टेबाजी के लिए भी है बदनाम
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। जीशान हत्याकांड के राज सिविल लाइन थानाक्षेत्र के चक्कर की मिलक में दफन होने की आशंका है। क्योंकि वारदात में नामजद आरोपी चक्कर की मिलक के रहने वाले हैं। अपहरण के बाद फोन भी चक्कर की मिलक के पास रहने वाले युवक के गुम हुए मोबाइल के सिम कार्ड से किया गया था। सूत्रों का कहना है कि फोन भी चक्कर की मिलक के पास से ही किया जाता था। ऐसे में संभावना है कि जीशान हत्याकांड को चक्कर की मिलक के पास ही अंजाम दिया गया है, वारदात के बाद सिर कटा शव बहकर बरबलान पहुंचा है।
चक्कर की मिलक में संगीन वारदातों को अंजाम देने वाले कई नामी आरोपी भी रहते हैं। सट्टेबाजी की सूचना पर पूर्व में पुलिस कई बार इस कालोनी में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार भी कर चुकी है। रामगंगा विहार में दिनदहाडे़ सराफ के घर डकैती की वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह के ज्यादातर आरोपी भी इसी चक्कर की मिलक कालोनी के ही रहने वाले थे। सराफ के मासूम बेटे की गर्दन पर पिस्टल लगाकर आरोपियों ने वारदात की थी। जिसके बाद शहर में सनसनी फै ल गई थी। भाडे़ पर हत्या करने वाले आरोपी भी इस कालोनी में खुद को महफूज महसूस करते हैं। इस कालोनी में तंग गलियां है और आरोपियों के ठिकाने पर पुलिस के पहुंचने से पहले उनको सूचना मिल जाती है, जिस वजह से वह पुलिस से बचकर आरोपी वहां से भाग निकलने में कामयाब हो जाते हैं। बड़ी वारदातों में ज्यादातर पुलिस का शक चक्कर की मिलक में रहने वाले आरोपियों पर ही होता है।
पुलिस ने खंगाला जेल से छूटे आरोपियों का ब्योरा
मुरादाबाद। जीशान हत्याकांड में भी पुलिस ने खासतौर पर जेल से छूटे चक्कर की मिलक में रहने वाले आरोपियों का ब्योरा खंगाला है। संगीन वारदातों को अंजाम देने वाले 10 से ज्यादा आरोपी इस दिनों जेल से बाहर हैं, जो कि अपने घर पर भी मौजूद नहीं हैं। वारदात में इन आरोपियों की भूमिका है या नहीं, यह अब तक स्प्ष्ट नहीं हो सका है लेकिन पुलिस इन आरोपियों के ठिकानों का पता लगा रही है। नामजद आरोपियों सहित पांच संदिग्धों को पूछताछ के लिए पुलिस की टीम ने उठाया है। अब तक उनसे खास मदद नहीं मिल सकी है।
पुलिस की लापरवाही से मौत के बाद लावारिस बन गया था जीशान
मुरादाबाद। जीशान के अपहरण की सूचना को पुलिस हल्के में लेती रही। परिवार वाले चीख चीखकर कहते रहे कि जीशान का अपहरण हो गया है लेकिन पुलिस इसे महज गुमशुदगी का मामला मानती रही। मामला पुलिस के आलाधिकारियों के भी संज्ञान में दूसरे दिन आ गया था लेकिन जीशान को ढूंढने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। बदमाशों ने हत्या कर 15 किलोमीटर दूर रामगंगा नदी में जीशान का सिर कटा शव फेंक दिया लेकिन उनको शव लाकर ठिकाने लगाते हुए भी किसी पुलिसकर्मी ने नहीं देखा है।
जीशान का शव 19 अगस्त को मुगलपुरा में पुलिस को मिला लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। एक दिन वह लावारिस ही मोर्चरी में पड़ा रहा। 20 अगस्त को जब सोशल मीडिया की मदद से परिवार वालों को पता चला कि बरबलान में एक शव मिला है, जिसने नीले रंग का लोअर पहन रखा है तो वह चिंतित हो गए। खुद परिवार वालों ने पुलिस से संपर्क साधा और शव की पहचान करने के लिए पहुंचे तो जीशान के शव की शिनाख्त हो सकी है। इससे पता चलता है कि जीशान के अपहरण के बाद शहर की ही पुलिस को उसके बारे में जानकारी नहीं थी, वरना पांच दिन पहले अपहरण किए गए जीशान की पहचान 19 अगस्त को ही हो जाती।