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गठबंधन से निपटने को 50 फीसदी का फार्मूला

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मुरादाबाद।
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लोकसभा चुनावों के लिए सपा - बसपा के बीच हुए गठबंधन ने मंडल के सभी छह भाजपा सांसदों के लिए 2019 की राह मुश्किल कर दी है। 2014 में मंडल की सभी छह लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कराने वाली भाजपा को अब 2019 में इन नतीजों को दोहरा पाना आसान नहीं होगा। सांसद भी गठबंधन से बिगड़े गणित से अंजान नहीं हैं। लेकिन पार्टी आलाकमान ने सांसदों को गठबंधन से घबराने के बजाए मत प्रतिशत बढ़ाने की कवायद में जुटने का संदेश दिया है। पार्टी आलाकमान ने कहा है कि जीत दर्ज कराने के लिए कुल मतदान के 50 प्रतिशत मत हासिल करने की समीकरण बैठाएं।
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सपा - बसपा के गठबंधन के बाद पश्चिमी यूपी के कई भाजपा सांसदों ने पार्टी आलाकमान को अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। कई सीट ऐसी हैं जिन पर भाजपा की राह बेहद मुश्किल होगी। पार्टी आलाकमान ने सांसदों को संदेश दिया है कि पहले से भी अधिक सक्रियता के साथ जनता के बीच जाएं। सरकार की उपलब्धियां बताएं और कुल मत प्रतिशत के 50 हिस्से को अपने पक्ष में करें। पार्टी ने जीत का फार्मूला तो दे दिया लेकिन इस फार्मूले को लागू कर पाना कितना जटिल है, यह बात सांसद भी अच्छी तरह से समझते हैं। सांसदों को पता है कि कुल मतदान का 50 फीसदी वोट लेना आसान काम नहीं है। अब आगे की रणनीति गठबंधन के प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद बनेगी। फिलहाल बदले हालात में भाजपा सांसदाें की नींद उड़ी है। बड़ी चुनौती अनुसूचित जाति के मतों को गठबंधन में जाने से रोकने की है। भाजपा इन्हें साधने का हरेक जतन कर रही है। भाजपा के साथ ही संघ के ओहदेदार भी अनुसूचित जाति के मतदाताओं के बीच भाजपा को उनका सच्चा हितैषी साबित करने की कवायद में जुटे हैं।
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