राजरानी और कुसुम जिस ब्रजभवन के दूसरी मंजिल पर किराए पर रहती थी। उस मकान को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है। आठ माह पहले तो कुछ लोग इस मकान पर कब्जा करने के लिए पहुंच गए थे। वहां पर रह रही साधना और उनके परिवार को मकान से बाहर निकलने के लिए कहा जा रहा था, इस मामले की शिकायत पर मुगलपुरा थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंची थी, बाद में साधना ने थाने में तहरीर दी थी।
मकान में रहने वाली राजरानी की भतीजी साधना का कहना है कि करीब सात, आठ लोग वहां पर आए थे। वह खुद को एक कारोबारी के करीबी बता रहे थे। जबरदस्ती उनसे मकान खाली करवाना चाहते थे, उनका कहना था कि संपत्ति पर वह कारोबारी का स्वामित्व चाहते हैं। लंबे समय से इसका इंतजार किया रहा है। अचानक सात, आठ लोग आए तो साधना ने पुलिस को सूचना दी थी। साधना का कहना है कि पुलिस से शिकायत करने के बाद दूसरे पक्ष के लोग उनको दोबारा से घर से निकालने के लिए नहीं पहुंचे।
पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस मकान पर कब्जे की शिकायत को लेकर पुलिस ने पहले गंभीरता क्यों नहीं दिखाई। अगर उस वक्त ही इस मामले की तफ्तीश कर शिकंजा कसा गया होता तो इस संपत्ति विवाद का निपटारा हो सकता था। एसएचओ मुगलपुरा गजराज सिंह ने बताया की संपत्ति विवाद की शिकायत उनके कार्यकाल में नहीं की गई थी। उनकी तैनाती से पहले साधना ने शिकायत करने की बात कही है।
15 से 25 रुपये तय था किराया, वो भी दिया नहीं जाता: साधना
साधना ने बताया कि मकान के जिस हिस्से में वह रह रही हैं, उसका किराया 15 रुपये और जिस हिस्से में कुसम, राजरानी रह रही थीं, उसका किराया 25 रुपये कई वर्ष पहले तय किया गया था। जो कि पूर्व मकान मालिक ने तय किया था। बाद में उन्होंने किराया लेना भी बंद कर दिया था, क्योंकि लंबा समय इस मकान में रहते हुए परिवार को हो गया था तो मकान मालिक ने किराया माफ कर दिया था। पूर्व मकान मालिक ने इस मकान को 15 साल पहले बेच दिया है, वर्तमान में जो मकान मालिक हैं। उनको भी किराया न दिए जाने की बात साधना ने नहीं की है। उनका कहना है कि नए मकान मालिक ने नया किरायानामा भी नहीं बनवाया है।