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कोड़ियों में किराए पर दिया एमडीए का नया दफ्तर

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मुरादाबाद।
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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने दिल्ली रोड पर नया मुरादाबाद में बने अपने नए आफिस को 137410 रुपये महीना किराए पर रजिस्ट्री विभाग को दे दिया है। यहां उप निबंधक प्रथम और द्वितीय के कार्यालय शिफ्ट होंगे। रविवार को बेहद खामोशी से दोनों कार्यालयों की शिफ्टिंग का काम शुरू हुआ। लेकिन जैसे ही वकीलों को भनक लगी उन्हाेंने हंगामा शुरू कर दिया। वकीलों ने तालाबंदी करके कार्यालय शिफ्टिंग का कार्य रुकवा दिया। अधिवक्ताओं का कहना है कि कचहरी से दोनो कार्यालयों को नया मुरादाबाद में शिफ्ट किया गया तो इससे अधिवक्ताओं को परेशानी होगी।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने करीब 15 साल पहले नया मुरादाबाद में 5000 वर्ग मीटर भूमि पर करोड़ों रुपये खर्च करके अपने लिए एक नया व आलीशान दफ्तर तैयार किया था। लेकिन बनने के बाद से ही यह दफ्तर बंद पड़ा है। प्राधिकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नया मुरादाबाद में बनाए गए आवास व कालोनियां भी खंडहर हो चले हैं। बीते वर्षों में कई बार एमडीए आफिस और आवासों को आशियाना कालोनी से नया मुरादाबाद में शिफ्ट करने की कवायद चली। एक बार तो आफिस का कुछ सामान यहां शिफ्ट भी कर दिया गया लेकिन बाद में कर्मचारियों के विरोध पर सामान वापस कांठ रोड स्थित कार्यालय भेज दिया गया।
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वीसी कनक त्रिपाठी के आने के बाद नए कार्यालय को बेचने का फैसला किया गया। कार्यालय को किराए पर उठाए जाने का खुलासा रविवार को उस समय हुआ जब यहां उप निबंधक प्रथम व द्वितीय के कार्यालय शिफ्ट होने लगे। इसकी भनक लगते ही वकीलों ने हंगामा शुरू कर दिया। दोनों कार्यालय अभी तक कचहरी परिसर में ही स्थित हैं। हंगामा कर रहे अधिवक्ताओं का कहना था कि उप निबंधक कार्यालय यदि कचहरी से नया मुरादाबाद में भेजा जाता है तो इससे बैनामा कराने वाले लोगों के साथ ही अधिवक्ताओं को भी असुविधा होगी। प्रकरण में डीएम राकेश कुमार सिंह ने महानिरीक्षक निबंधन के आदेश का जिक्र किया है, जिसमें उप निबंधक प्रथम और द्वितीय के कार्यालयों के लिए प्राधिकरण का नया कार्यालय 137412 रुपये महीना के किराए पर लेने की अनुमति दी गई।
मामले में प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता राजीव दीक्षित का कहना है कि एमडीए की बोर्ड बैठक में नए कार्यालय को बेचने का फैसला हो चुका है। कई बार इसके लिए विज्ञापन निकाला गया लेकिन कोई खरीददार नहीं पहुंचा। डीएम की दर के आधार पर कार्यालय के एक तल को रजिस्ट्री विभाग को किराए पर दिया गया है।
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प्राधिकरण की दूसरी संपत्तियां भी कौड़ियों के मोल
मुरादाबाद।
मिड टाउन क्लब से लेकर मानसरोवर पैराडाइज तक प्राधिकरण के सभी सामुदायिक केंद्र कौड़ियों के मोल एमडीए ने किराए पर उठा रखे हैं। नियमों पर गौर करें तो यह सामुदायिक केंद्र संबंधित योजना के आवंटियों की संपत्ति है। जिसे बेचने का प्राधिकरण को कोई अधिकार नहीं है। लेकिन एमडीए के तत्कालीन अफसरों ने किराएनामे की ऐसी शर्तें तैयार कीं कि इन्हें 15-15 वर्ष बाद भी एमडीए किराएदारों के चंगुल से छुड़ा नहीं पा रहा है। किराएदारों ने निर्माण कराकर इनकी शक्ल तक बदल दी है। जबकि किराए की पहली शर्त है कि किराएदार भवन की मूल बनावट से छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे। संबंधित योजना के आवंटियों को जो संपत्ति शादी - ब्याह और दूसरे आयोजनों के लिए सिर्फ मेंटीनेंस दर पर मिलनी चाहिए थी वह अब होटलों की तरह उन्हें मोटे किराए चुकाकर मिल रही है। अब एमडीए की एक और संपत्ति कौड़ियों के मोल किराए पर जाने से लोग हैरान हैं। हालांकि एमडीए अधिकारियों का तर्क है कि इस बार संपत्ति सरकारी विभाग को किराए पर दी गई है।
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